मुंबई: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को भारी गिरावट के साथ खुला. पश्चिम एशिया (West Asia) (ईरान-अमेरिका संघर्ष) में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के हालिया भाषण ने वैश्विक निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है. इसके चलते सेंसेक्स (Sensex) 872 अंक (1.19%) गिरकर 72,262 पर खुला, जबकि निफ्टी (Nifty) 300 अंकों (1.31%) की गिरावट के साथ 22,383.40 के स्तर पर पहुंच गया.
बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दौर शुरू हो गया. बैंकिंग, रियल्टी, ऑटो, मेटल और फार्मा जैसे सभी प्रमुख सेक्टर नुकसान के साथ कारोबार कर रहे हैं। निफ्टी 50 के शेयरों में सन फार्मा, इंडिगो, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और एलएंडटी (L&T) जैसे बड़े नाम सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में शामिल रहे. यह भी पढ़ें: Iran War Update: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान; कहा- 'सैन्य अभियान लक्ष्य के करीब, समझौता नहीं हुआ तो किए जाएंगे और भी विनाशकारी हमले
युद्ध और ट्रंप के भाषण का असर
बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों की धारणा पर सबसे गहरा असर राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन से पड़ा है. उन्होंने संघर्ष को समाप्त करने का कोई ठोस रोडमैप पेश करने के बजाय नई चेतावनियां जारी कीं, जिससे अनिश्चितता बढ़ गई. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी से मध्यम अवधि में बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है.
वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की स्थिति
भारतीय बाजारों की तरह अन्य एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई. जापान का निक्केई (Nikkei), हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 3 प्रतिशत तक टूट गए. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड वायदा 5.24% बढ़कर $106.47 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड $104.64 पर कारोबार कर रहा है. यह भी पढ़ें: Stocks To Buy or Sell Today, April 2, 2026: रेलटेल, कोल इंडिया और JSW स्टील समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर; जानें आज के बड़े ट्रिगर्स
विदेशी निवेशकों की निकासी
बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से ₹8,331 करोड़ के शेयर बेचे. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹7,171.80 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की. भारतीय रुपया भी दबाव में बना हुआ है, लेकिन वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार के संकेतों के बीच इसमें स्थिरता देखी जा रही है.
बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे फिलहाल सतर्क रहें और कच्चे तेल की चाल व विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें.













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