लंदन/न्यूयॉर्क, 11 मई: वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में करीब 4% की भारी बढ़त दर्ज की गई. इस उछाल के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) द्वारा ईरान (Iran) के ताजा परमाणु प्रस्ताव को खारिज करना और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) का वह बयान है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि तेहरान के साथ संघर्ष 'अभी खत्म नहीं हुआ है.' इन भू-राजनीतिक तनावों ने मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति (Oil Supplies From Middle East) बाधित होने की आशंकाओं को फिर से जीवित कर दिया है.
बाजार में कीमतों का हाल
सोमवार को अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 3.08% बढ़कर 95.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 3.16% की बढ़त के साथ 104.49 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान दोनों बेंचमार्क 4% की बढ़त के करीब पहुंच गए थे, जो वैश्विक बाजार में बढ़ते तनाव का सीधा असर दर्शाता है.
ट्रंप का सख्त रुख और वार्ता में गतिरोध
कच्चे तेल की कीमतों में इस अचानक तेजी का सबसे बड़ा कारण राष्ट्रपति ट्रंप का वह 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट है, जिसमें उन्होंने ईरान के शांति प्रस्ताव को "पूरी तरह अस्वीकार्य" करार दिया. ट्रंप के इस रुख से उन उम्मीदों को गहरा झटका लगा है, जिसमें माना जा रहा था कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित खोला जा सकेगा और वैश्विक तेल प्रवाह स्थिर हो पाएगा.
बेंजामिन नेतन्याहू की चेतावनी
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक टीवी इंटरव्यू (60 मिनट्स) के दौरान स्पष्ट किया कि ईरान के साथ संवर्धित यूरेनियम और मिसाइल उत्पादन जैसे गंभीर मुद्दे अभी अनसुलझे हैं. जब उनसे पूछा गया कि इजरायल और अमेरिका ईरान की परमाणु सामग्री को कैसे हटाएंगे, तो उन्होंने कड़े लहजे में कहा, "अंदर जाओ और उसे बाहर निकाल लो." उनके इस बयान ने बाजार को संकेत दिया कि सैन्य तनाव और बढ़ सकता है, जिससे तेल बुनियादी ढांचे को खतरा हो सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक आपूर्ति की लाइफलाइन
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में तेजी का असली कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ती चिंता है. दुनिया का लगभग 20% तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है. सिटीग्रुप (Citigroup) के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच गतिरोध बना रहता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं. हालांकि वर्तमान में वैश्विक भंडार और रणनीतिक पेट्रोलियम रिलीज ने कीमतों को एक सीमा तक थाम रखा है, लेकिन तनाव बढ़ने पर ये सुरक्षा कवच नाकाफी साबित हो सकते हैं.
आने वाले हफ्तों में क्या होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में और तेजी आने के पीछे ये चार प्रमुख कारण हो सकते हैं:
- अमेरिका-ईरान परमाणु कूटनीति का पूरी तरह विफल होना.
- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी.
- ईरानी परमाणु या ऊर्जा ठिकानों पर इजरायल की संभावित सैन्य कार्रवाई.
- मध्य पूर्व से कच्चे तेल के निर्यात में लंबे समय तक व्यवधान.
जब तक वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रगति नहीं होती, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता बनी रहने की संभावना है.












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