'ये प्रवचन नहीं, नाकामी के सबूत हैं': पीएम मोदी की 'बचत' वाली अपील पर राहुल गांधी का तीखा पलटवार
राहुल गांधी (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 11 मई: पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा देशवासियों से की गई 'सात अपीलों' पर अब राजनीति गरमा गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता (Leader of Opposition in Lok Sabha) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोमवार को प्रधानमंत्री पर तीखा हमला करते हुए उनकी अपीलों को "प्रवचन" के बजाय "सरकार की नाकामी का सबूत" (Proof of the Government's Failure) करार दिया. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपनी जवाबदेही से बचने के लिए जनता पर जिम्मेदारी का बोझ डाल रहे हैं. यह भी पढ़ें: PM Narendra Modi Appeal: क्या देश में फिर लौटेगा Work From Home कल्चर? पीएम मोदी की अपील ने बढ़ाई हलचल

राहुल गांधी का 'विफलता' वाला प्रहार

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए पीएम मोदी के नेतृत्व पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा, 'मोदी जी ने कल जनता से बलिदान मांगे - सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और तेल में कटौती करो. ये प्रवचन नहीं, बल्कि विफलता के प्रमाण हैं.'

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि 12 वर्षों के शासन के बाद देश को ऐसी स्थिति में ला दिया गया है जहाँ जनता को यह बताया जा रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहाँ जाना चाहिए. उन्होंने पीएम मोदी को 'कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम' (समझौतावादी प्रधानमंत्री) कहते हुए तंज कसा कि देश चलाना अब उनके बस की बात नहीं रही.

पीएम मोदी की 'आर्थिक आत्मरक्षा' की अपील

इससे पहले रविवार को सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए नागरिकों से सहयोग मांगा था. उन्होंने कहा था कि खाद्य तेल और उर्वरकों के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है.

प्रधानमंत्री ने तर्क दिया था कि यदि हर घर खाद्य तेल के उपयोग में कटौती करे, तो यह न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा बल्कि 'देशभक्ति' में भी बड़ा योगदान होगा. उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग आधा करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का भी आह्वान किया था. यह भी पढ़ें: पीएम मोदी का गुजरात दौरा: सोमनाथ मंदिर में करेंगे विशेष पूजा, वडोदरा में 150 करोड़ के 'सरदार धाम' कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन

‘ये उपदेश नहीं—असफलताओं के प्रमाण हैं’

देशभक्ति की नई परिभाषा और 'इकोनॉमिक मैनुअल'

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देशभक्ति को आधुनिक संदर्भ में परिभाषित करते हुए कहा कि यह केवल सीमा पर जान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी से जीने और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को पूरा करने के बारे में भी है. उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ती लागत को देखते हुए नागरिकों को 'आर्थिक आत्मरक्षा' के लिए तैयार रहने को कहा.

ईंधन की कीमतों में अस्थिरता से निपटने के लिए पीएम ने मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के अधिक उपयोग पर जोर दिया था.

विपक्ष का आरोप: जवाबदेही से बच रही सरकार

राहुल गांधी का मुख्य तर्क यह है कि अंतरराष्ट्रीय संकटों के बावजूद, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि हर बार सरकार जनता को आगे कर देती है ताकि वह खुद अपनी जवाबदेही से बच सके. विपक्ष का मानना है कि प्रधानमंत्री की ये अपीलें बढ़ती महंगाई और आर्थिक कुप्रबंधन को छिपाने की एक कोशिश हैं.