ब्लैक डेथ से लेकर कोविड-19 तक, महामारी ने हमेशा मृत्यु का सम्मान करना सिखाया
वैश्विक महामारी के कारण पिछले कुछ हॉलोवीन्स संदेह और चिंता में गुजरे इसलिए हैलोवीन 2022 मनाने के लिए तैयार लोगों को यह विशेष रूप से रोमांचक लग सकता है. महामारी पर नियंत्रण के लिए चल रही निरंतर सतर्कता और टीकाकरण प्रयासों से अमेरिका में बहुत से भाग्यशाली लोग मार्च 2020 के बाद के भयानक महीनों से उबर चुके हैं और सतर्क रूप से आशावादी महसूस कर रहे हैं.
नेवार्क, 28 अक्टूबर : वैश्विक महामारी के कारण पिछले कुछ हॉलोवीन्स संदेह और चिंता में गुजरे इसलिए हैलोवीन 2022 मनाने के लिए तैयार लोगों को यह विशेष रूप से रोमांचक लग सकता है. महामारी पर नियंत्रण के लिए चल रही निरंतर सतर्कता और टीकाकरण प्रयासों से अमेरिका में बहुत से भाग्यशाली लोग मार्च 2020 के बाद के भयानक महीनों से उबर चुके हैं और सतर्क रूप से आशावादी महसूस कर रहे हैं. मैं महामारियों का इतिहासकार हूं. और हाँ, हैलोवीन मेरी पसंदीदा छुट्टी है क्योंकि मुझे अपनी प्लेग डॉक्टर वाली पोशाक चोंच वाले मास्क के साथ पहनने को मिलती है. वैसे हैलोवीन सभी उम्र के लोगों के लिए स्वतंत्रता की एक छोटी सी खिड़की खोलता है. यह लोगों को उनकी सामान्य सामाजिक भूमिका, पहचान और व्यक्तित्व से आगे जाने की अनुमति देता है. यह डरावना पर चंचल होता है. भले ही मृत्यु प्रतीकात्मक रूप से काफी हद तक हैलोवीन में मौजूद है, यह जीवन का जश्न मनाने का भी समय है.
छुट्टी मिश्रित भावनाओं से आती है जो कोविड-19 युग के दौरान सामान्य से भी अधिक प्रतिध्वनित हुई. पिछली महामारियों से बचे लोगों ने व्यापक मौत के बीच जीवन की जीत का जश्न मनाने की कोशिश करने के तरीकों को देखते हुए वर्तमान अनुभव के संदर्भ को जोड़ सकते हैं. ब्लैक डेथ पर विचार करें - सभी महामारियों की जननी. ब्लैक डेथ ने मौत की एक नई संस्कृति को जन्म दिया ब्लैक डेथ प्लेग की एक महामारी थी, जो यर्सिनिया पेस्टिस जीवाणु के कारण होने वाली संक्रामक बीमारी थी. 1346 और 1353 के बीच, प्लेग ने पूरे एफ्रो-यूरेशिया में तबाही मचा दी और अनुमानित 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत आबादी को मार डाला.
ब्लैक डेथ समाप्त हो गया, लेकिन प्लेग जारी रहा, सदियों से समय-समय पर वापसी करता रहा. प्लेग के विनाशकारी प्रभावों और इसके निरंतर पुनरावर्तन ने जीवन को हर संभव तरीके से बदल दिया. एक पहलू मृत्यु के प्रति दृष्टिकोण था. यूरोप में, ब्लैक डेथ के कारण उच्च स्तर की मृत्यु दर और इसके बार-बार होने वाले प्रकोप ने मृत्यु को पहले से कहीं अधिक दृश्यमान और मूर्त बना दिया. यह भी पढ़ें : Long COVID: लंबे समय तक कोरोना से पीड़ित रहने वाले लोग हो सकते हैं “ब्रेन फॉग” का शिकार, ये हैं लक्षण
मृत्यु की सर्वव्यापकता ने एक नई मृत्यु संस्कृति के निर्माण में योगदान दिया, जिसे कला में अभिव्यक्ति मिली. उदाहरण के लिए, मृत्यु के नृत्य या ‘‘डांस मैकाब्रे’’ की छवियों ने मृतकों और जीवितों को एक साथ दिखाया. भले ही मृत्यु का प्रतिनिधित्व करने वाले कंकाल और खोपड़ी प्राचीन और मध्यकालीन कला में दिखाई दिए थे, लेकिन ब्लैक डेथ के बाद ऐसे प्रतीकों ने नए सिरे से जोर पकड़ा. इन छवियों ने जीवन की क्षणिक और अस्थिर प्रकृति और सभी - अमीर और गरीब, युवा और बूढ़े, पुरुष और महिलाओं के लिए मृत्यु की आसन्नता का चित्रण किया. मृत्यु के लिए कलाकारों के अलंकारिक संदर्भों ने मृत्यु के समय की निकटता पर बल दिया.
ताबूत और समय दर्शाने वाले चश्मे सहित खोपड़ी और अन्य स्मृति चिन्ह , पुनर्जागरण चित्रों में दर्शकों को यह याद दिलाने के लिए दिखाई दिए कि मृत्यु आसन्न है, इसलिए सभी को इसके लिए तैयारी करनी चाहिए. ब्रूगल द एल्डर के प्रसिद्ध ‘‘ट्रायम्फ ऑफ डेथ’’ ने मृत्यु की अप्रत्याशितता पर जोर दिया: कंकालों की सेनाएं लोगों पर चढ़ाई करती हैं और उनकी जान ले लेती हैं, चाहे वे तैयार हों या नहीं.मृत्यु संस्कृति ने 19वीं सदी के पश्चिमी यूरोपीय डॉक्टरों को प्रभावित किया जिन्होंने ऐतिहासिक महामारियों के बारे में लिखना शुरू किया. इस लेंस के माध्यम से, उन्होंने पिछली महामारियों - ब्लैक डेथ, विशेष रूप से - के एक विशिष्ट संस्करण की कल्पना की जिसे एक आधुनिक इतिहासकार ने ‘‘गॉथिक महामारी विज्ञान’’ का नाम दिया. ब्लैक डेथ के 300 साल बाद ही - प्लेग के रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने पूरा शरीर ढकने वाले विशेष कपड़े और एक चोंच वाला मुखौटा पहनना शुरू कर दिया, जो आधुनिक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का अग्रदूत था.
मृत्यु की विजय या जीवन का उत्सव?
महामारी का मतलब कभी भी सभी के लिए मौत और पीड़ा नहीं है. इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि ब्लैक डेथ सर्वाइवर्स ने बेहतर जीवन स्तर और बढ़ी हुई समृद्धि का अनुभव किया. बाद के प्रकोपों के दौरान भी, वर्ग, स्थान और लिंग के अंतर ने लोगों के अनुभवों को प्रभावित किया. उदाहरण के लिए, शहरी गरीबों की मृत्यु अधिक संख्या में हुई और अमीर वर्ग के लोग अपने गांव के घरों में रहने चले गए.
ब्लैक डेथ के तत्काल बाद में लिखी गई जियोवानी बोकासियो की प्रसिद्ध ‘‘डेकैमरोन’’, उन 10 युवाओं की कहानी बताती है, जिन्होंने ग्रामीण इलाकों में शरण ली, वह एक-दूसरे को मनोरंजक कहानियां सुनाते थे ताकि वह प्लेग और आसन्न मृत्यु की भयावहता को भूल सकें. बाद का एक उदाहरण ओगियर घिसेलिन डी बसबेक है, जो ओटोमन साम्राज्य में एक हब्सबर्ग राजदूत था, जिसने 1561 में प्लेग के प्रकोप के दौरान इस्तांबुल के तट पर प्रिंसेस द्वीपों में शरण ली थी. उनके संस्मरण में बताया गया है कि कैसे उन्होंने अपने दिन मछली पकड़ने और अन्य सुखद बातों का आनंद लेते हुए बिताए, जबकि शहर में मरने वालों का आंकड़ा महीनों तक 1,000 के पार बना रहा. अनगिनत उदाहरण इस बात की गवाही देते हैं कि प्लेग के बार-बार होने वाले प्रकोप ने लोगों को जीवन और मृत्यु को गले लगाने के नए तरीके खोजने के लिए प्रेरित किया.
कुछ के लिए, इसका मतलब धर्म की ओर मुड़ना था: प्रार्थना, उपवास और धार्मिक सभा. कुछ अन्य के लिए, इसका मतलब अत्यधिक शराब पीना, पार्टी करना और अवैध यौन संबंध था. अभी तक कोई नहीं जानता कि कोविड-19 महामारी को कैसे याद किया जाएगा. लेकिन फिलहाल, हैलोवीन एक साथ जीवन का जश्न मनाने और मृत्यु पर चिंतन करने के लिए महामारी से सबक लेने का सही अवसर है. हैलोवीन अब सालाना 10 अरब अमरीकी डालर का उद्योग है - आपको यह सोचकर राहत महसूस हो सकती है कि आप जीवन और मृत्यु के बारे में कैसा महसूस करते हैं और खुद को उन लोगों के साथ कैसे जोड़ पाते हैं जो पिछली महामारियों से जीवित बचे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 28, 2022 01:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

