Fact Check: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक सनसनीखेज पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि दुनिया के प्रतिष्ठित समाचार संस्थान बीबीसी (BBC) ने एक रिपोर्ट जारी की है. इस कथित रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों ने कोविड-19 (COVID-19) की वैक्सीन लगवाई है, वे जून 2026 के बाद जीवित नहीं रहेंगे. हालांकि, गहन जांच और तथ्यों के विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह दावा पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत है.
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट का दावा
यह भ्रामक जानकारी @maryaamsss_ नामक एक यूजर द्वारा साझा की गई थी. पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि बीबीसी ने आधिकारिक तौर पर दुनिया भर के अरबों टीकाकृत लोगों के लिए एक "एक्सपायरी डेट" (समाप्ति तिथि) की पुष्टि की है. यह नैरेटिव उन पुरानी "जनसंख्या कम करने" (Depopulation) वाली साजिशों (Conspiracy Theories) का हिस्सा है, जो 2021 में वैक्सीन रोलआउट के समय से ही इंटरनेट पर मौजूद हैं. जून 2026 जैसी एक निश्चित तारीख बताकर लोगों के मन में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है. यह भी पढ़े: Fact Check: माउंट आबू में बंजी जंपिंग के दौरान लड़की की मौत? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का ‘फैक्ट चेक’ और असली सच्चाई
क्या बीबीसी ने ऐसी कोई रिपोर्ट दी है?
इस दावे की सच्चाई जानने के लिए जब बीबीसी की आधिकारिक वेबसाइट और उनके प्रमाणित सोशल मीडिया हैंडल की जांच की गई, तो वहां ऐसी किसी भी रिपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. बीबीसी के वैश्विक समाचार डेटाबेस की खोज से यह पुष्टि हुई है कि संस्थान ने कभी भी 2026 में टीकों से जुड़ी सामूहिक मृत्यु की संभावना वाली कोई कहानी प्रकाशित नहीं की है. कई अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग संगठनों ने भी इस रिपोर्ट को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है.
दावे की असलियत
चिकित्सा विज्ञान और जीव विज्ञान के पास "टाइम-रिलीज़" मौत की तारीख जैसा कोई आधार नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार:
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वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को उत्तेजित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं.
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टीका लगने के कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर शरीर इसे पूरी तरह प्रोसेस कर लेता है.
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वैक्सीन शरीर में किसी "काउंटडाउन मैकेनिज्म" (उल्टी गिनती वाली मशीन) की तरह लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहती है.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सीडीसी (CDC) जैसे वैश्विक निकायों ने अरबों डोज की निगरानी की है और दीर्घकालिक जीवित रहने के जोखिम का कोई डेटा सामने नहीं आया है.
अफवाहों से सावधान रहने की जरूरत
जून 2026 की समय सीमा का दावा करने वाली यह पोस्ट एक खतरनाक "होक्स" (धोखा) है, जिसे केवल डर फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया है. यह पूरी तरह से फर्जी मीडिया क्रेडेंशियल पर निर्भर है और इसे किसी भी वैध पत्रकारिता या चिकित्सा विज्ञान का समर्थन प्राप्त नहीं है.
आज के डिजिटल युग में जहां "फेक न्यूज" सेकंडों में बनाई जा सकती है, उपयोगकर्ताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे सनसनीखेज दावों को प्राथमिक स्रोतों से सत्यापित करें. यदि "वैश्विक मृत्यु तिथि" जैसी कोई गंभीर खबर सच होती, तो यह केवल एक अनवेरिफाइड अकाउंट की पोस्ट तक सीमित न रहकर दुनिया के हर न्यूज़ नेटवर्क की हेडलाइन होती.













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