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पाकिस्तान-तालिबान में ठनी, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- अब जंग ही रास्ता, इस्तांबुल बैठक पर छाया संकट

तुर्की में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान को 'जंग' की सीधी धमकी दे दी है, जिससे माहौल गरमा गया है. यह तनाव सीमा पर हमलों को लेकर है, जबकि दोनों देश इस्तांबुल में युद्धविराम पक्का करने के लिए मिल रहे हैं.

पाकिस्तान-तालिबान में ठनी, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बोले- अब जंग ही रास्ता, इस्तांबुल बैठक पर छाया संकट
(Photo : X)

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते इतने खराब हो चुके हैं कि अब खुलेआम 'जंग' की धमकियां दी जाने लगी हैं. तुर्की के इस्तांबुल शहर में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होनी है, लेकिन इस बातचीत से ठीक पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे बवाल मच गया है.

उन्होंने तालिबान सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. इस बयान ने शांति की कोशिशों पर पलीता लगा दिया है.

पाकिस्तान ने क्यों दी 'जंग' की धमकी?

बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू के दौरान एक पत्रकार ने ख्वाजा आसिफ से पूछा कि क्या अफगानिस्तान में तालिबान से निपटने के लिए सैन्य टकराव ही एकमात्र रास्ता बचा है. इस पर उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया, "जंग होगी."

यह भड़काऊ बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी तुर्की और कतर की मध्यस्थता में इस्तांबुल में मिलने वाले थे.

क्या है पूरा विवाद?

पिछले कई हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर जबरदस्त तनाव है. दोनों तरफ से घातक झड़पें और ड्रोन हमले हुए हैं.

  • पाकिस्तान का आरोप: पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान अपने यहां उन आतंकियों (खासकर TTP) को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में घुसकर हमले करते हैं.
  • अफगानिस्तान का पलटवार: वहीं, तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है. उनका कहना है कि पाकिस्तान खुद आम नागरिकों पर ड्रोन से हमले कर रहा है और ISIS आतंकियों को ट्रेनिंग देने के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है.

शांति वार्ता का क्या होगा?

इस्तांबुल में होने वाली इस "अफगान-पाकिस्तान शांति वार्ता" का मकसद पिछले महीने दोहा में हुए नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को बचाना था. लेकिन अब माहौल पूरी तरह बिगड़ गया है.

इस बातचीत में पाकिस्तान की तरफ से खुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और ISI चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद आसिम हिस्सा ले रहे हैं. वहीं, अफगानिस्तान की टीम का नेतृत्व खुफिया चीफ अब्दुल हक वासिक कर रहे हैं.

पाकिस्तान में भी आपस में ठनी

दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार के अंदर भी सब ठीक नहीं है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अपनी ही खुफिया एजेंसी ISI पर तंज कसा है.

उन्होंने 2021 की उस मशहूर तस्वीर का जिक्र किया, जिसमें तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद तत्कालीन ISI चीफ वहां "चाय का कप" हाथ में लिए नजर आए थे. इशाक डार ने कहा, "वह चाय का कप पाकिस्तान को महंगा पड़ गया." उनका मतलब साफ था कि तालिबान की वापसी का जश्न मनाना पाकिस्तान की बड़ी भूल थी, क्योंकि वही लोग अब पाकिस्तान के दुश्मन बन गए हैं.

व्यापार ठप, हजारों कंटेनर फंसे

इस लड़ाई का सीधा असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ा है. पाकिस्तान ने व्यापार के रास्ते बंद कर दिए हैं, जिससे दोनों तरफ भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान के 8,000 से ज्यादा कंटेनर पाकिस्तान में फंसे हुए हैं और 4,000 और घुसने का इंतजार कर रहे हैं.

फिलहाल, तुर्की और कतर दोनों देशों को समझाने में लगे हैं. उनका कहना है कि शांति के लिए संयम बरतना जरूरी है. लेकिन पाकिस्तान की "जंग" की धमकी के बाद, यह शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही दम तोड़ती दिख रही है.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 06, 2025 07:52 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).