चीन को किनारे कर अमेरिका से दोस्ती? ट्रंप को कीमती खनिज दिखाते पाकिस्तान के PM और आर्मी चीफ की फोटो वायरल
(Photo : X)

एक नई तस्वीर ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है. इस तस्वीर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कुछ कीमती खनिज (Rare Earth Minerals) दिखाते हुए नजर आ रहे हैं. यह मुलाकात पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में हुई थी.

हैरानी की बात यह है कि इस मुलाकात को लेकर व्हाइट हाउस ने न तो कोई आधिकारिक बयान जारी किया और न ही कोई तस्वीर साझा की, जो आमतौर पर ऐसी बड़ी बैठकों के बाद किया जाता है. यह तस्वीर अब सामने आई है, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

तस्वीर के पीछे की कहानी क्या है?

यह बैठक कुछ ही दिनों पहले इस्लामाबाद में हुए एक बड़े समझौते के बाद हुई. 8 सितंबर को पाकिस्तान ने अमेरिका की एक कंपनी 'यूनाइटेड स्टेट्स स्ट्रैटेजिक मेटल्स' (USSM) के साथ दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे. इस कार्यक्रम में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर दोनों मौजूद थे.

इन समझौतों के तहत, पाकिस्तान अमेरिका को सुरमा, तांबा, सोना, टंगस्टन और कई अन्य दुर्लभ खनिज निर्यात करेगा. आगे चलकर पाकिस्तान में इन खनिजों को प्रोसेस करने के लिए प्लांट भी लगाए जाएंगे. बताया जा रहा है कि पहले फेज में अमेरिका करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा.

पाकिस्तान का बड़ा दांव

जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की एक बड़ी रणनीतिक चाल है. इसे "खनिज कूटनीति" (Minerals Diplomacy) कहा जा रहा है. इसके जरिए पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहता है.

यह कदम चीन के साथ पाकिस्तान के गहरे संबंधों को संतुलित करने की एक कोशिश भी है. पाकिस्तान लंबे समय से चीन के 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (CPEC) का हिस्सा रहा है, लेकिन अब वह अमेरिका के साथ भी अपनी दोस्ती बढ़ा रहा है.

ये खनिज उद्योग, रक्षा और साफ-सुथरी ऊर्जा (Clean Energy) टेक्नोलॉजी के लिए बहुत ज़रूरी माने जाते हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजर इन पर है.

हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी देते हैं कि इन समझौतों का असली फायदा मिलने में अभी सालों लग सकते हैं. पाकिस्तान को बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर खुदाई करने के लिए सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

कुल मिलाकर, यह तस्वीर और इसके पीछे का समझौता यह दिखाता है कि पाकिस्तान अपने कीमती प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके अमेरिका जैसे बड़े देशों के साथ अपने संबंध सुधारने और अपनी geopolitical स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.