Dog Census in Bihar: बिहार के सासाराम में सरकारी शिक्षकों को दिया गया आवारा कुत्तों की गिनती का जिम्मा, नगर निगम के आदेश पर विवाद
सासाराम नगर निगम ने सरकारी शिक्षकों को अपने स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लावारिस कुत्तों की गणना करने का आदेश दिया है, जिसका शिक्षक संघ कड़ा विरोध कर रहे हैं
- Read in
- English
Dog Census in Bihar: बिहार के रोहतास जिले के सासाराम नगर निगम द्वारा जारी एक हालिया निर्देश ने शिक्षा जगत में नया विवाद खड़ा कर दिया है.नगर निगम प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों के शिक्षकों को लावारिस कुत्तों का डेटा एकत्र करने और उनकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. इस आदेश के बाद उन शिक्षकों में भारी नाराजगी है जो पहले से ही कई गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दबे हुए हैं.
नोडल अधिकारी के रूप में होगी शिक्षकों की तैनाती
नगर निगम के आदेश के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को एक शिक्षक को 'नोडल अधिकारी' के रूप में नियुक्त करना होगा. इन शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे स्कूल परिसर और उसके आसपास के आवारा कुत्तों की संख्या दर्ज करें, उनकी स्थिति का आकलन करें और उनके नियंत्रण के लिए सुझाव दें। प्रशासन का कहना है कि इस डेटा का उपयोग डॉग पाउंड (कुत्तों के लिए आश्रय स्थल) बनाने और पशु प्रबंधन की योजना तैयार करने के लिए किया जाएगा. Chennai: दो घंटे के अंदर 29 लोगों को काटने वाले कुत्ते की हत्या, स्वास्थ्य मंत्री जनगणना कराने की बनाई योजना
फैसले पर शिक्षकों का कडा विरोध
इस नए निर्देश पर शिक्षकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. शिक्षक संघों का तर्क है कि बिहार में शिक्षकों को पहले से ही जनगणना, चुनाव के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की ड्यूटी, जाति आधारित गणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता रहा है. शिक्षकों का कहना है कि इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित होती है और अब कुत्तों की गिनती का काम उनके पेशे की गरिमा के खिलाफ है.
प्रशासन का पक्ष
सासाराम नगर आयुक्त विकास कुमार ने इस आदेश का बचाव करते हुए कहा कि यह स्थानीय स्तर पर लावारिस पशु प्रबंधन को मजबूत करने के सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप है. नगर निगम ने इसके लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां नामित नोडल शिक्षक अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे. अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से शहर में बढ़ते कुत्तों के आतंक को कम करने में मदद मिलेगी.
बिहार में बढ़ता आवारा कुत्तों का संकट
बिहार के कई जिलों में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गया और रोहतास जैसे जिलों में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) के मामले तेजी से बढ़े हैं. हालांकि, विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि पशुओं की निगरानी और प्रबंधन का काम नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग या पशु कल्याण अधिकारियों का होना चाहिए, न कि स्कूल के कर्मचारियों का.
बता दें कि कि इससे पहले महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी शिक्षकों को ऐसे कार्यों में लगाने पर विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. फिलहाल, सासाराम के शिक्षक इस आदेश को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 07, 2026 03:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

