Nepal PM KP Sharma Oli Resigns: नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली का इस्तीफा, राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में लिखीं ये बातें, लेटर आया सामने
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. यह कदम छात्र-नेतृत्व वाले हिंसक प्रदर्शनों के बीच सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के उनके कार्यालय में घुसने के बाद उठाया गया. ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना त्यागपत्र सौंपा, जो अब सार्वजनिक हो चुका है
Nepal PM KP Sharma Oli Resigns: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. यह कदम छात्र-नेतृत्व वाले हिंसक प्रदर्शनों के बीच सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के उनके कार्यालय में घुसने के बाद उठाया गया. ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को अपना त्यागपत्र सौंपा, जो अब सार्वजनिक हो चुका है. इस पत्र में उन्होंने देश की 'असाधारण परिस्थितियों' का हवाला देते हुए इस्तीफे की वजह बताई. बांग्लादेश के बाद यह दूसरा मौका है, जब युवा आंदोलन ने सरकार को सत्ता से बेदखल किया.
त्यागपत्र में क्या लिखा: ओली की ओर से स्पष्टीकरण
ओली के त्यागपत्र पत्र में संक्षिप्त और औपचारिक शब्दों में इस्तीफे का कारण बताया गया। पत्र में लिखा है: "माननीय राष्ट्रपति महोदय, नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के तहत 31 आषाढ़ 2081 बीएस (15 जुलाई 2024) को मुझे प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया गया था। वर्तमान में देश में व्याप्त असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और संवैधानिक राजनीतिक समाधान को सुगम बनाने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 77 (1) ए के तहत तत्काल प्रभाव से प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे रहा हूं. यह भी पढ़े: VIDEO: नेपाल छोड़कर भाग सकते हैं प्रधानमंत्री KP Sharma Oli, हवाई सेवाएं प्रभावित करने में जुटे प्रदर्शनकारी; भारत ने Border पर बढ़ाई निगरानी
राष्ट्रपति को भेजे गए त्यागपत्र में लिखीं ये अहम बातें
#BREAKING: Nepal Prime Minister KP Sharma Oli resigns after deadly protests in Kathmandu minutes after Nepal Parliament gutted by youth protestors. pic.twitter.com/i4qmhoqQNZ
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) September 9, 2025
पत्र में प्रदर्शनों, भ्रष्टाचार के आरोपों या हिंसा का कोई सीधा उल्लेख नहीं है.विश्लेषकों का मानना है कि ओली ने सामान्य शब्दों का उपयोग कर राजनीतिक दबाव से बचने की कोशिश की. पत्र में उनकी उपलब्धियों या व्यक्तिगत टिप्पणी का भी जिक्र नहीं है, जो उनके पिछले कार्यकालों के बयानों से अलग है.
प्रदर्शनों का दबाव:
सोमवार से शुरू हुए जेन-जेड प्रदर्शन सोशल मीडिया बैन से भड़के, लेकिन जल्द ही भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और असमानता के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने ओली के निजी आवास पर आग लगाई और संसद भवन पर कब्जे की कोशिश की। कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की मौत और 300 से अधिक घायल होने की खबर है। पुलिस पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगा।
इस दबाव में गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी और स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल ने इस्तीफा दे दिया। नेपाली कांग्रेस के 9 मंत्रियों ने समर्थन वापस लिया, और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जल्द चुनाव की मांग की। सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने भी ओली को इस्तीफा देने की सलाह दी थी.
छोटा कार्यकाल: चौथी बार सत्ता छिनी
ओली का यह चौथा कार्यकाल था, जो नेपाली कांग्रेस के समर्थन से 15 जुलाई 2024 को शुरू हुआ। वे सिर्फ 1 साल और 2 महीने तक पद पर रह सके। इससे पहले उन्होंने 2015-16, 2018-21 और 2021 में कुछ समय के लिए सरकार का नेतृत्व किया था। इस बार भ्रष्टाचार के आरोप, चीन-समर्थक नीतियां और भारत के साथ सीमा विवाद उनके खिलाफ भारी पड़े। प्रदर्शनकारी उन्हें 'नेपो किड्स' को बढ़ावा देने वाला मानते थे.
सोशल मीडिया बैन बनी आंदोलन की शुरुआत
4 सितंबर को सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया था, क्योंकि ये नेपाल के रजिस्ट्रेशन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। युवाओं ने इसे 'चीन मॉडल सेंसरशिप' करार दिया। सोमवार रात बैन हटाया गया, लेकिन आंदोलन तब तक भ्रष्टाचार और शासन के खिलाफ जन-क्रांति बन चुका था। काठमांडू मेयर बालेन शाह ने ओली को 'आतंकवादी' तक कहा.
नेपाल में अस्थिरता पर भारत की नजर
ओली के इस्तीफे ने नेपाल को राजनीतिक संकट में धकेल दिया है. नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल गठबंधन टूटने की कगार पर है। राष्ट्रपति भवन पर भी हमला हुआ। भारत ने स्थिति पर चिंता जताई और मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रदर्शनकारी 'पूर्ण लोकतंत्र' और 'भ्रष्टाचार मुक्त सरकार' की मांग कर रहे हैं। काठमांडू एयरपोर्ट बंद है, और भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट है. विश्लेषक इसे 'जन-जेड क्रांति' करार दे रहे हैं, जो नेपाल की राजनीति को बदल सकती है.
(इनपुट आईएएनएस)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 09, 2025 03:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

