Middle East Conflict: फारस की खाड़ी में गहराया समुद्री संकट, सैन्य संघर्ष के बीच 5 की मौत; 69 का रेस्क्यू और 10 से अधिक जहाज क्षतिग्रस्त

Middle East Conflict: फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और आसपास के समुद्री क्षेत्रों (Marine Areas) में सैन्य संघर्ष (Military Conflict)  के कारण सुरक्षा हालात अत्यंत तनावपूर्ण हो गए हैं. इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (Information Fusion Centre-Indian Ocean Region) (IFC-IOR) के ताजा अपडेट के अनुसार, इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों पर ड्रोन, मिसाइल और अन्य प्रोजेक्टाइल से हमलों में तेजी आई है. इन हमलों में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चलाए गए बचाव अभियानों में 69 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट संकट पर स्पेन और अमेरिका में तनातनी, प्रधानमंत्री सांचेज ने हमलों को बताया 'रूसी रूलेट', ट्रंप ने स्पेन से व्यापारिक संबंध तोड़ने की दी धमकी

हमलों की चपेट में आए प्रमुख जहाज

आंकड़ों के अनुसार, 10 से अधिक जहाजों को सीधे तौर पर प्रोजेक्टाइल या मिसाइलों से निशाना बनाया गया है, जबकि तीन अन्य जहाजों के पास विस्फोट की घटनाएं दर्ज की गई हैं. क्षतिग्रस्त या लक्षित जहाजों में 'हरक्यूलिस स्टार', 'स्टेना इम्परेटिव', 'ओशन इलेक्ट्रा', 'एथे नोवा', 'स्काईलाइट' और 'लिब्रा ट्रेडर' जैसे जहाज शामिल हैं. ये घटनाएं मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन के तटों के आसपास केंद्रित रही हैं.

भारतीय नाविकों पर असर और भारत की प्रतिक्रिया

इस संकट का भारतीय नाविकों और जहाजों पर भी गहरा असर पड़ा है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम कर रहे कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है, जबकि एक अन्य घायल हुआ है। मंत्रालय के अनुसार, लगभग 37 भारतीय ध्वज वाले जहाज, जिनमें 1,100 से अधिक नाविक सवार हैं, क्षेत्र में फंसे हुए हैं.

भारत सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत एक 'क्विक रिस्पांस टीम' का गठन किया है. केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल स्थिति की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं. साथ ही, भारतीय नौसेना, विदेश मंत्रालय और IFC-IOR के समन्वय से भारतीय जहाजों और नाविकों की 24x7 निगरानी की जा रही है.

वैश्विक व्यापार और नेविगेशन पर प्रभाव

इन हमलों के कारण समुद्री सुरक्षा मानकों में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, का यातायात लगभग ठप हो गया है. नेविगेशन के लिए महत्वपूर्ण GNSS और GPS जैमिंग के साथ-साथ AIS सिग्नल में अनियमितता ने जहाजों के लिए खतरा बढ़ा दिया है.

अनेक शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों के मार्ग बदल दिए हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है. तटों पर और एंकरेज क्षेत्रों में बड़े तेल टैंकरों और LNG वाहक जहाजों की भारी भीड़ जमा हो गई है, जो अपनी यात्रा आगे बढ़ाने के बजाय सुरक्षित स्थिति का इंतजार कर रहे हैं. यह भी पढ़ें: बाजार में भारी गिरावट: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सेंसेक्स 1,122 अंक लुढ़का, निफ्टी भी 1.55% टूटा

सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश

IFC-IOR और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने सभी व्यापारी जहाजों को 'बेस्ट मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज' (BMP) का पालन करने की सलाह दी है. जहाजों को अपनी सुरक्षा स्थिति बढ़ाने, ब्रिज वॉच को सतर्क रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। स्थिति अत्यंत संवेदनशील है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम लगातार बना हुआ है.