कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) राज्य में चल रहे विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Modification) यानी एसआईआर (SIR) के विरोध में शुक्रवार दोपहर से मध्य कोलकाता (Central Kolkata) के एस्प्लेनेड ईस्ट (Esplanade East) में अपना अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन (Indefinite Strike) शुरू करेंगी. जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता शुक्रवार सुबह एस्प्लेनेड ईस्ट में इकट्ठा होना शुरू करेंगे. मुख्यमंत्री के दोपहर करीब 2 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने और प्रदर्शन शुरू करने की उम्मीद है. यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल मतदाता सूची पुनरीक्षण, ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद रखीं दलीलें, मामले की सुनवाई के बाद चुनाव आयोग को नोटिस
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'फिलहाल यह तय किया गया है कि धरना प्रदर्शन अनिश्चित काल तक चलेगा. हमारी मुख्य मांगें हैं कि मतदाता सूची से एक भी वास्तविक मतदाता को बाहर न किया जाए और पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव उन 63 लाख मामलों को मतदाता सूची से बाहर रखकर न कराए जाएं, जिन पर वर्तमान में न्यायिक सुनवाई चल रही है.'
संयोगवश, मुख्यमंत्री के धरने का स्थान पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से मात्र 1.5 किलोमीटर दूर है. मुख्यमंत्री का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन चुनाव आयोग की पूरी बेंच के 8 मार्च की रात को कोलकाता पहुंचने से ठीक पहले शुरू हो रहा है. इस बेंच का नेतृत्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार कर रहे हैं और अगले दो दिनों का उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त है.
एस्प्लेनेड ईस्ट स्थित धरने के स्थल पर एक विशाल मंच स्थापित किया गया है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने यह संकेत नहीं दिया है कि प्रदर्शन कितने समय तक चलेगा, लेकिन मंच के आकार और वहां की व्यवस्था को देखते हुए लगता है कि विरोध प्रदर्शन काफी देर तक जारी रहेगा. यह भी पढ़ें: Banglar Yuva Sathi Scheme 2026: पश्चिम बंगाल के बेरोजगार युवाओं को मिलेंगे हर महीने ₹1500, जानें पात्रता और आवेदन की पूरी प्रक्रिया
संयोगवश, सीपीआई (एम) भी सीईओ के कार्यालय के सामने 24 घंटे का लंबा धरना प्रदर्शन कर रही थी, जो बुधवार दोपहर से शुरू होकर गुरुवार दोपहर को समाप्त हुआ. इस प्रदर्शन की मांग यह थी कि जब तक 'तार्किक विसंगति' श्रेणी के तहत वर्गीकृत मतदाताओं के दस्तावेजों पर चल रही न्यायिक कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य में चुनाव नहीं होने चाहिए.
सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस ने दावा किया है कि उनके प्रतिनिधि 9 मार्च को भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के साथ अपनी बातचीत में यही मांग उठाएंगे. कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर न्यायिक निर्णय प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदान कराने की यही मांग उठाई है.













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