पटना: बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में एक ऐतिहासिक बदलाव (Historial Change) की शुरुआत हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (chief Minister Nitish Kumar) ने गुरुवार, 5 मार्च को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वे आगामी राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) में उम्मीदवार होंगे. 2005 से बिहार के 'सुशासन बाबू' के रूप में पहचाने जाने वाले नीतीश कुमार का यह कदम राज्य की सत्ता में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन का संकेत है. उन्होंने जनता के नाम एक भावनात्मक संदेश में कहा कि यह निर्णय उन्होंने गहन विचार-विमर्श के बाद लिया है. यह भी पढ़ें: बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़: क्या सीएम नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा? राज्यसभा जाने की अटकलों से हलचल तेज
'संसद के चारों सदनों' तक पहुंचने का लक्ष्य
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में कहा, ‘मेरे संसदीय करियर की शुरुआत से ही मेरे मन में यह इच्छा थी कि मैं राज्य और केंद्र की दोनों सदनों का सदस्य रहूं. यही कारण है कि मैं आगामी चुनाव में राज्यसभा सदस्य बनना चाहता हूं.’ इस कदम के साथ ही वे भारत के उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा, चारों सदनों में प्रतिनिधित्व किया है.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव संपन्न होने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे, ताकि सत्ता का हस्तांतरण सुचारू रूप से हो सके. उन्होंने नई सरकार को अपना पूर्ण समर्थन और मार्गदर्शन देने का भी आश्वासन दिया है.
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री
नीतीश कुमार के इस फैसले के साथ ही उनके बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने पुष्टि की है कि निशांत आज पार्टी में शामिल हो सकते हैं और जल्द ही उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, ताकि पार्टी का आधार बना रहे और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को मजबूती मिले.
बिहार की सत्ता का नया समीकरण
यह बदलाव 2025 के विधानसभा चुनावों के महज चार महीने बाद हो रहा है, जिसमें एनडीए ने शानदार जीत दर्ज की थी. यद्यपि नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे हैं, लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के हटने के बाद, अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है.
जदयू के वरिष्ठ नेता और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक बैठकों का दौर चला, जिसमें संगठनात्मक रणनीति को अंतिम रूप दिया गया. यह भी पढ़ें: BJP Rajya Sabha Candidates List: बीजेपी ने महाराष्ट्र से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की जारी की सूची, विनोद तावड़े सहित इन 4 नेताओं को मिला टिकट
एक युग का अंत
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री कार्यालय से हटना नवंबर 2005 से शुरू हुए एक लंबे युग का समापन है. अपने 'सुशासन' मॉडल और जटिल गठबंधन राजनीति को साधने के लिए प्रसिद्ध नीतीश कुमार ने बिहार में बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुधारों के कई बड़े काम किए. उनका राज्यसभा जाने का निर्णय न केवल एक ‘ग्रेसफुल एग्जिट’ (शालीन विदाई) माना जा रहा है, बल्कि यह एनडीए को केंद्र में मजबूत करने और पार्टी के भीतर की पीढ़ीगत जरूरतों को पूरा करने की एक सोची-समझी रणनीति भी है.













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