बिहार में बदलाव की बयार, नीतीश जाएंगे राज्यसभा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

बिहार की राजनीति के अंदरखाने में चल रहे घटनाक्रम का परिणाम अंतत: होली के अगले दिन सुबह में सतह पर आ गया. दस बार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके जेडीयू नेता नीतीश कुमार अब केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होंगे.नीतीश कुमार ने 5 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन का पर्चा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भरा. नीतीश के साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और आरएलएम (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी नॉमिनेशन किया. बिहार से राज्यसभा की पांच सहित कुल 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होगा. 20 मार्च को चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. बिहार से एनडीए की ओर से दो-दो सीटें बीजेपी और जेडीयू के खाते में गई है, वहीं एक सीट आरएलएम को मिली है.

नीतीश कुमार ने कहा है कि उनके जीवन की एक इच्छा थी कि वह विधानमंडल तथा संसद के दोनों सदनों का सदस्य बनें. इस इच्छा को पूरा करने के लिए वह राज्यसभा जा रहे हैं. राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन का पर्चा भरने के आखिरी दिन उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए राज्यसभा का चुनाव लड़ने की जानकारी दी. वह बिहार विधानसभा, विधान परिषद तथा लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं. इस पोस्ट के जरिए उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है. उन्होंने राज्यसभा जाने की बात के साथ यह भी कहा है कि विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा और जो नई सरकार बनेगी, उसको उनका पूरा सहयोग व मार्गदर्शन रहेगा.

2000 में पहली बार बने थे मुख्यमंत्री

बीते दो दशक के दौरान नीतीश कुमार दस पारियों में 19 साल से अधिक समय तक बिहार के मुख्यमंत्री (सीएम) रह चुके हैं. सत्ता के पर्याय बन चुके नीतीश के बारे में कहा ही जाता है कि चाहे किसी भी गठबंधन की सरकार बने, सीएम वह ही होते हैं. नीतीश कुमार पहली बार वर्ष 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, किंतु अपना बहुमत नहीं सिद्ध कर सके. उनका कार्यकाल मात्र सात दिनों का रहा था. इसके बाद 2005 में उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. इस कार्यकाल में कानून-व्यवस्था सहित जनहित में कई अन्य कड़े फैसले लिए.

2010 में तीसरी बार उन्होंने सरकार बनाई. इस कार्यकाल में उनकी छवि सुशासन और विकास करने वाले राजनेता के रूप में उभरी. 2015 में उन्होंने महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस के साथ सरकार बनाई. 2017 में नीतीश महागठबंधन छोड़ फिर एनडीए के साथ आ गए. 2022 में फिर उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ दिया और महागठबंधन के साथ सरकार बना ली. जनवरी, 2024 में फिर उन्होंने एनडीए में वापसी की और नौवीं बार मुख्यमंत्री बने. 20 नवंबर, 2005 को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजदूगी में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

जेडीयू में आक्रोश, प्रदर्शन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद कुछ जेडीयू कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए 5 मार्च की सुबह मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि नीतीश कुमार ने इतना सुंदर बिहार बनाया है, वे कहीं नहीं जा रहे. वहां पहुंचे एमएलसी संजय गांधी, मंत्री सुरेंद्र मेहता और जेडीयू विधायक प्रेम मुखिया को उन लोगों ने सीएम आवास के अंदर नहीं जाने दिया.

कार्यकर्ताओं ने पार्टी के दफ्तर में भी हंगामा किया, तोड़फोड़ की तथा ललन सिंह, संजय झा और विजय कुमार चौधरी के विरोध में नारे लगाए. इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह सब कुछ लोगों का खेल है. वे जयचंद की भूमिका निभा रहे हैं. उनलोगों ने पार्टी को तोड़ने का काम किया है. 2030 तक के लिए जनादेश मिला था. विधानसभा के बाहर भी जेडीयू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. बेगूसराय, नालंदा समेत कई जिलों में पार्टी के नेता-कार्यकर्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

'जेडीयू को खत्म कर देगी बीजेपी'

वहीं, इस प्रकरण को लेकर विपक्षी दलों ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है. आरजेडी, कांग्रेस और सीपीआई-सीपीएमएल ने इसे बिहार की जनता और जनादेश के साथ धोखा करार दिया है. कहा है कि नीतीश के चेहरे पर पांच साल के लिए जनादेश लिया गया था, लेकिन बीजेपी ने वोटरों के साथ बीच में ही छल कर दिया है.

आरजेडी नेता व बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "बीजेपी बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू कर रही है. हमने तो पहले ही कहा था कि नीतीश सीएम नहीं रहेंगे. जेडीयू को बीजेपी खत्म कर देगी. नीतीश कुमार को हाईजैक कर लिया गया है." इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी ने कहा कि "सबको पता है बीजेपी अपने सहयोगियों को खत्म कर देती है. जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं." उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी नहीं चाहती है कि ओबीसी, दलित व अति पिछड़े समाज और सामाजिक न्याय के लोग आगे बढ़ें.

समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने तंज कसते हुए कहा है कि बिहार के साथ अब क्या होगा, यह तो हम नहीं बता सकते. लेकिन, एक बात साफ है कि जनता के साथ धोखा हुआ है, अगर उन्होंने पहले ही राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा जता दी होती तो शायद नतीजा कुछ और होता. वहीं, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन यादव ने नीतीश के बेटे निशांत से राजनीति में आने की अपील करते हुए कहा है कि वे बिहार को बीजेपी का चारागाह ना बनने दें.

अगला मुख्यमंत्री कौन

नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन किए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि अब बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. कयास लगाया जा रहा कि नीतीश का ही कोई करीबी मुख्यमंत्री होगा या बीजेपी अपनी कार्यप्रणाली के अनुरूप किसी छोटे चेहरे को सीएम बनाएगी. फिर इसमें सवर्ण, ओबीसी, ईबीसी के चेहरे को कमान दी जा सकती है.

राजनीतिक समीक्षक एके चौधरी कहते हैं, ‘‘बीजेपी बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है. वह चुनाव परिणाम के बाद से ही अपना सीएम बनाना चाह रही थी. साथ ही, वह यह भी नहीं चाह रही कि कोई दूसरा नीतीश कुमार बिहार में बने. निश्चित तौर पर बीजेपी किसी बड़े चेहरे पर दांव नहीं लगाएगी, चाहे वह जेडीयू का हो या फिर उनकी ही पार्टी का.''

अगर बीजेपी से बड़े चेहरे की बात करें तो इनमें सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय व विजय कुमार सिन्हा और जेडीयू से विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी का नाम आता है. यह भी हो सकता है कि वे अपने ही समाज या अति पिछड़ा समाज के किसी नेता का नाम दें. 2014-15 में जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर वे ऐसा कर भी चुके हैं. वैसे, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा भी है कि बिहार में नई सरकार नीतीश कुमार ही तय करेंगे. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की पॉलिटिकल एंट्री के लिए भी यह प्रकरण एक प्लेटफॉर्म बन सकता है.