संयुक्त राष्ट्र: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों (Attacks on Commercial Shipping) को लेकर भारत (India) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और तनाव कम करने के लिए कूटनीति का सहारा लेने की अपील की है. यह भी पढ़ें: हॉर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ी कूटनीतिक पहल, नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों ने सुरक्षित समुद्री रास्तों पर बनाई साझा रणनीति
वीटो पर भारत का संतुलित रुख
हाल ही में रूस और चीन ने सुरक्षा परिषद (UNSC) के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया था, जिसमें ईरान से हमलों को रोकने की मांग की गई थी. इस मुद्दे पर भारत ने किसी का पक्ष लेने के बजाय तटस्थता अपनाई. महासभा में भारतीय प्रतिनिधि ने कहा, हमने सभी राज्यों से संवाद, कूटनीति और तनाव कम करने को बढ़ावा देने का आग्रह किया है. भारत ने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल जीवाश्म ईंधन यातायात के लगभग 20 प्रतिशत के लिए मुख्य मार्ग है। भारत के लिए इसकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- आर्थिक सुरक्षा: इस मार्ग में बाधा आने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है.
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा: संघर्ष के दौरान जहाजों पर तैनात कई भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है, जिसे भारत ने 'अस्वीकार्य' बताया है.
- व्यापार की स्वतंत्रता: भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नौवहन की स्वतंत्रता का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए. यह भी पढ़ें: India-US Relations: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और पश्चिम एशिया के हालातों पर हुई चर्चा
वैश्विक शक्तियों के बीच मतभेद
रूस और चीन ने अपने वीटो का बचाव करते हुए कहा कि बहरीन द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव 'एकतरफा' था. रूस का तर्क है कि यह प्रस्ताव उन इजरायली और अमेरिकी कार्रवाइयों की अनदेखी करता है जिनसे संघर्ष भड़का. वहीं, चीन का कहना है कि वह प्रस्ताव को मंजूरी देकर अनधिकृत सैन्य अभियानों को 'वैधता का जामा' नहीं पहनाना चाहता था.
दूसरी ओर, अमेरिका और खाड़ी देशों ने इस वीटो की तीखी आलोचना की है. अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने और दक्षिण एशिया में खाद (fertilizer) की आपूर्ति रोककर खाद्य संकट पैदा करने का आरोप लगाया.
भारत की पिछली कूटनीतिक भूमिका
हालांकि भारत वर्तमान वीटो पर तटस्थ है, लेकिन 11 मार्च को भारत ने बहरीन द्वारा लाए गए एक अन्य प्रस्ताव का सह-प्रायोजन (co-sponsor) किया था, जिसमें ईरान द्वारा पड़ोसियों पर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी. उस समय रूस और चीन वोटिंग से अनुपस्थित रहे थे, जिससे प्रस्ताव पारित हो गया था.
भारत का ताजा बयान दर्शाता है कि वह अपने आर्थिक हितों और अंतरराष्ट्रीय नियमों की सुरक्षा चाहता है, लेकिन वह वैश्विक शक्तियों के बीच चल रहे कूटनीतिक युद्ध में सीधे तौर पर किसी एक पक्ष के साथ खड़ा होने से बच रहा है.













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