नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) का फोन आया. इस दौरान दोनों वैश्विक नेताओं ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की. पीएम मोदी (PM Modi) ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) को अपना "मित्र" बताया और द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की. यह भी पढ़ें: US-Iran War: शांति वार्ता फेल होने और Trump की धमकी के बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ी तनातनी, क्या दोबारा शुरू होगा युद्ध?
पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के अस्थिर हालातों पर चिंता व्यक्त की. पीएम मोदी ने विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को 'खुला और सुरक्षित' रखने के महत्व पर जोर दिया. भारत का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क के लिए इस समुद्री मार्ग का निर्बाध बने रहना अनिवार्य है.
भारत ने लगातार तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति का समर्थन किया है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम का भारत ने स्वागत किया है, इस उम्मीद के साथ कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी.
21वीं सदी की परिभाषित रणनीतिक साझेदारी
हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी स्पष्ट किया था कि वाशिंगटन अपनी दीर्घकालिक वैश्विक रणनीति के केंद्र में भारत को देख रहा है. अमेरिका का लक्ष्य नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को 21वीं सदी की "परिभाषित रणनीतिक साझेदारी" में बदलना है.
राजदूत गोर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को एक सच्चा दोस्त मानते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच के संबंध और अधिक प्रगाढ़ होते हैं.
रक्षा और तकनीकी सहयोग मुख्य स्तंभ
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग इस समय सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है. राजदूत गोर ने संकेत दिया कि नया 10-वर्षीय ढांचा रक्षा औद्योगिक उत्पादन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और परिचालन समन्वय में सहयोग का विस्तार करेगा. दोनों देश एक ऐसी साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं जो न केवल सैन्य रूप से बल्कि तकनीकी और रणनीतिक रूप से भी एक-दूसरे की पूरक होगी. यह भी पढ़ें: Iran-US Peace Talks: जंग को लेकर दुनिया में बढ़ी चिंता, इस्लामाबाद में विफल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, बिना किसी समझौते के लौटे प्रतिनिधिमंडल; VIDEO
परिणामों पर केंद्रित कूटनीति
अमेरिकी कूटनीति इस समय 'परिणामोन्मुखी' (Results-Oriented) शैली पर ध्यान केंद्रित कर रही है. राष्ट्रपति ट्रंप के कार्य करने के तरीके का जिक्र करते हुए गोर ने कहा कि उनका ध्यान अमेरिकी लोगों के लिए कुछ ठोस और सकारात्मक परिणाम देने पर रहता है, जिसमें भारत के साथ मजबूत संबंध एक अहम भूमिका निभाते हैं.
इस बातचीत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत और अमेरिका की रणनीतिक एकजुटता विश्व राजनीति और व्यापारिक सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है.













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