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भारत ने चीनी के निर्यात पर लगाई रोक: सितंबर 2026 तक निर्यात रहेगा 'प्रतिबंधित', घरेलू आपूर्ति और महंगाई को बताया कारण

भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी के निर्यात पर सितंबर 2026 तक प्रतिबंध लगा दिया है. वाणिज्य मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया है.

भारत ने चीनी के निर्यात पर लगाई रोक: सितंबर 2026 तक निर्यात रहेगा 'प्रतिबंधित', घरेलू आपूर्ति और महंगाई को बताया कारण
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 14 मई: भारत सरकार (Government of India) ने घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित करने और मुद्रास्फीति (महंगाई) के जोखिमों को कम करने के लिए चीनी के निर्यात (Sugar Exports) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.  यह प्रतिबंध सितंबर 2026 तक जारी रहेगा. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, चीनी के निर्यात को अब "प्रतिबंधित" श्रेणी से हटाकर "निषिद्ध" (Prohibited) श्रेणी में डाल दिया गया है. य़ह भी पढ़ें: PM मोदी का बड़ा फैसला, आम जनता से अपील के बाद ईंधन बचत के लिए खुद के काफिले में वाहनों की संख्या घटाई

निर्यात प्रतिबंध के दायरे और अपवाद

यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी पर लागू होगा. हालांकि, सरकार ने कुछ विशेष मामलों में छूट दी है. 13 मई से पहले जिन खेपों का निर्यात शुरू हो चुका था, उन्हें अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार की विशेष मंजूरी के बाद निर्यात संभव होगा. यूरोपीय संघ और अमेरिका को मौजूदा कोटा व्यवस्था के तहत किए जाने वाले निर्यात पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी.

उत्पादन में गिरावट और आपूर्ति की चिंता

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब चीनी उत्पादन के अनुमानों में संशोधन किया गया है.  'इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन' ने चालू सीजन के लिए उत्पादन अनुमान को 32.4 मिलियन टन से घटाकर 32 मिलियन टन कर दिया है.

आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के सीजन में कुल उपलब्धता लगभग 325 लाख टन रहने की उम्मीद है, जबकि घरेलू मांग ही 280 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में सीजन के अंत तक स्टॉक घटकर 45 लाख टन रह सकता है, जो 2016-17 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा.

महंगाई और मौसम का जोखिम

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच सरकार ने यह कदम महंगाई पर लगाम लगाने के लिए उठाया है. इसके अलावा, अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से मानसून कमजोर रहने की आशंका ने भी चिंता बढ़ा दी है, जिससे अगले सीजन (2026-27) में गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है.

ग्लोबल मार्केट पर असर

भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है. भारत के इस फैसले का असर वैश्विक बाजारों पर तुरंत देखने को मिला. न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ 'रॉ शुगर' के वायदा भाव में 2 प्रतिशत और लंदन में 'व्हाइट शुगर' के भाव में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एशिया और अफ्रीका के कई देश चीनी के लिए भारतीय निर्यात पर निर्भर हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on May 14, 2026 08:49 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).