PM मोदी का बड़ा फैसला, आम जनता से अपील के बाद ईंधन बचत के लिए खुद के काफिले में वाहनों की संख्या घटाई
(Photo Credits Twitter)

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)  ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए ईंधन संरक्षण और मितव्ययिता की दिशा में एक बड़ा उदाहरण पेश किया है. प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या को काफी कम कर दिया है. यह कदम सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत तेल की खपत कम करने और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है.

गुजरात-असम दौरों में दिखा छोटा काफिला

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के हालिया गुजरात और असम दौरों के दौरान काफिले के वाहनों में यह कटौती स्पष्ट रूप से देखी गई. हाल ही में हैदराबाद में एक संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने नागरिकों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, अनावश्यक यात्रा टालने और संभव हो तो 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाने का आग्रह किया था. इसी संदेश को खुद से लागू करते हुए उन्होंने अपने दौरों में वाहनों की संख्या को सीमित करने का निर्णय लिया.  यह भी पढ़े:  PMGKAY Scheme Update: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 6 महीनों के लिए बढ़ाई गई पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना

सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि काफिले का आकार छोटा करने के बावजूद प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कोई कमी नहीं की गई है. स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के सभी अनिवार्य प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानक पूरी तरह से लागू हैं. केवल उन सहायक वाहनों की संख्या को कम किया गया है जिनकी अनुपस्थिति से सुरक्षा व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ता. इस कदम को सरकारी तंत्र और नागरिकों के बीच ईंधन बचाने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक प्रतीकात्मक पहल माना जा रहा है.

राज्यों को भेजी गई 'मितव्ययिता कार्ययोजना'

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को ऊर्जा बचत और मितव्ययिता के उपायों को अपनाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) भेजी है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय ने उपस्थित मुख्यमंत्रियों को इस योजना की प्रतियां सौंपीं.

इस योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • आधिकारिक दौरों में वाहनों की संख्या का औचित्य तय करना.

  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के उपयोग को प्राथमिकता देना.

  • शारीरिक बैठकों के बजाय वर्चुअल मीटिंग्स पर जोर देना.

  • अनावश्यक सरकारी यात्राओं में कटौती करना.

पश्चिम एशिया संकट और भारत की तैयारी

प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव आ रहा है. हालांकि सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार है और आपूर्ति की कोई तत्काल कमी नहीं है, फिर भी आयात बिल और मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने के लिए संरक्षण जरूरी है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हलचल सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है.

राज्यों ने भी शुरू किए प्रयास

केंद्र की सलाह के बाद कई मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्यों में इसी तरह के मितव्ययिता उपाय शुरू कर दिए हैं. कुछ राज्यों ने पहले ही आधिकारिक काफिलों का आकार छोटा करना और डिजिटल समन्वय को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में भी गैर-जरूरी यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने और ईंधन खपत सीमित करने के आंतरिक निर्देश जारी किए गए हैं.