चीनी सौर तकनीक में कैसा खतरा देखता है यूरोपीय संघ?
यूरोप में सौर ऊर्जा का बढ़ता चलन चीनी तकनीक की बदौलत है.
यूरोप में सौर ऊर्जा का बढ़ता चलन चीनी तकनीक की बदौलत है. फिर इसी तकनीक को पूरे यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा के लिए खतरा क्यों बताया जा रहा है. अब, ईयू इस निर्भरता को कम करने की दिशा में कदम उठा रहा है.यूरोपीय आयोग ने चीन में बनी सौर ऊर्जा तकनीक के लिए दी जाने वाली फंडिंग पर रोक लगा दी है. उसे डर है कि यह तकनीक यूरोप के पावर ग्रिड के लिए सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती है और बड़े पैमाने पर बिजली गुल होने का कारण भी बन सकती है.
इस फैसले की पुष्टि 4 मई को की गई. यह फैसला ईयू में बढ़ती उस चिंता को दिखाता है कि ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए चीन पर यूरोप की निर्भरता उसे सुरक्षा खतरों के प्रति संवेदनशील बना रही है.
यूरोपीय आयोग का यह फंडिंग प्रतिबंध मुख्य रूप से सोलर इनवर्टर पर केंद्रित है. इनवर्टर को अक्सर सोलर पावर सिस्टम का ‘दिमाग' कहा जाता है, क्योंकि वे ही पूरे सिस्टम को नियंत्रित करते हैं. ये सोलर इनवर्टर ऐसे डिवाइस होते हैं जो सौर ऊर्जा को इस्तेमाल लायक बिजली में बदलते हैं. ये इंटरनेट से जुड़े होते हैं. अक्सर इन्हें मेंटेनेंस और सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए दूर से ही एक्सेस किया जा सकता है.
पूरे यूरोप में बिजली गुल होने का खतरा
यूरोपियन सोलर मैन्युफैक्चरिंग काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल क्रिस्टोफ पोडेविल्स ने डीडब्ल्यू को बताया, "सभी इनवर्टर कंपनियों के पास ‘किल स्विच' जैसा कुछ होता है.”
किल स्विच और दूसरे रिमोट कनेक्शन आम तौर पर सुरक्षा या ग्रिड को स्थिर रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सबसे बुरे हालात में, हैकर्स या दुश्मन देश के लोग इन रिमोट कनेक्शन का गलत इस्तेमाल करके बिजली की आपूर्ति में रुकावट डाल सकते हैं. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ स्वांत्ये वेस्टफाल ने डीडब्ल्यू को बताया, "सबसे बुरा हाल यह होगा कि पूरे यूरोप में बड़े पैमाने पर बिजली गुल हो सकती है.”
स्पेन और पुर्तगाल में हुआ ब्लैकआउट अक्षय ऊर्जा के लिए कैसा संकेत
जिनेवा स्थित रिसर्च ग्रुप ‘लूम' के मुताबिक, 2024 में यूरोप में आयात किए गए सभी इनवर्टर में से 61 फीसदी चीन से आए थे. हुआवे और सनग्रो, इनवर्टर बनाने वाली दो ऐसी कंपनियां हैं जिनका दबदबा न सिर्फ यूरोपीय बाजारों, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में भी है. चीन की ही कुछ कंपनियों ने यूरोप की 220 गीगावाट से ज्यादा की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के लिए हार्डवेयर उपलब्ध कराया है. पोडेविल्स ने कहा, "इसे इस तरह से समझें कि लगभग 10 गीगावाट बिजली को कंट्रोल कर लेना ही यूरोप के बिजली ग्रिड में बड़ी गड़बड़ी पैदा करने के लिए काफी होगा.”
सोलर टेक्नोलॉजी में संदिग्ध कम्युनिकेशन डिवाइस
अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें चीन में बने इनवर्टर का इस्तेमाल करके किसी यूरोपीय ग्रिड के कुछ हिस्सों को बंद किया गया हो. हालांकि, 2025 में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के बाद चिंताएं और बढ़ गईं. इसमें बताया गया था कि अमेरिकी ऊर्जा अधिकारियों ने चीन में बने कुछ इनवर्टर के अंदर संदिग्ध कम्युनिकेशन डिवाइस पाए थे. वेस्टफाल कहते हैं, "यह असली खतरा है. यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है.”
इनवर्टर पर यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप, चीन से आयात की जाने वाली स्वच्छ ऊर्जा तकनीक पर अपनी व्यापक निर्भरता का फिर से आकलन कर रहा है.
लूम के मुताबिक, यूरोप में आयात किए जाने वाले 98 फीसदी सोलर पैनल और 88 फीसदी लिथियम-आयन बैटरी चीन से आते हैं. इस संगठन ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा तकनीकों में मौजूद ‘रिमोट एक्सेस' से पूरे पावर सिस्टम में कमियां या खतरा पैदा हो सकता है.
यूरोप में चीनी तकनीक का दबदबा
यूरोपीय आयोग अब उन चीनी आयातों के प्रति अधिक सख्त रुख अपना रहा है जिन्हें या तो सुरक्षा के लिए जोखिम माना जाता है या फिर यूरोपीय उद्योगों के लिए खतरा. मार्च में, यूरोपीय आयोग ने अपना ‘इंडस्ट्रियल एक्सीलरेटर एक्ट' पेश किया. इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा फंडिंग को यूरोप में बनी ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी' की ओर मोड़ना है. इसमें बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
आयोग ने अपने साइबर सुरक्षा अधिनियम का एक संशोधित रूप भी पेश किया है. यह आयोग को ज्यादा अधिकार देगा, ताकि वह यूरोपीय सदस्य देशों में संचार या ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों से चीनी कंपनियों को दूर रख सके या उन पर पाबंदी लगा सके. नए उपायों के तहत, यूरोपीय आयोग और यूरोपियन बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट जैसी संस्थाओं द्वारा सीधे मैनेज किए जाने वाले ईयू फंड का इस्तेमाल अब चीन में बने सोलर इनवर्टर खरीदने के लिए नहीं किया जा सकेगा.
ये प्रतिबंध उन खरीदारियों पर लागू नहीं होते जो सीधे यूरोपीय संघ के सदस्य देशों द्वारा की जाती हैं. इसके अलावा, पूरे यूरोप में पहले से ही लगे हुए चीनी इनवर्टर का इस्तेमाल जारी रखा जा सकेगा और उन्हें हटाया नहीं जाएगा. वेस्टफाल ने कहा, "यह सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन हमने उन चीनी इनवर्टर पर अपने बाजारों में रोक नहीं लगाई है.”
क्या यूरोपियन इनवर्टर इस कमी को पूरा कर सकते हैं?
यूरोपियन सोलर मैन्युफैक्चरिंग काउंसिल के मुताबिक, फिलहाल यूरोप के 80 फीसदी नए सोलर सिस्टम चीनी इनवर्टर पर निर्भर हैं. अगर मांग चीनी सप्लायर से हटकर दूसरी तरफ जाती है, तो यूरोप की कंपनियों को एक बड़ी कमी को पूरा करना होगा.
हालांकि, पोडेविल्स का मानना है कि यूरोपियन सप्लायर इसके लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, "कुछ ही महीनों के अंदर उत्पादन क्षमता को उस स्तर तक बढ़ाना मुमकिन है, जो मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है.”
यूरोपीय आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, यूरोप में बने इनवर्टर की कीमत चीनी इनवर्टर की तुलना में थोड़ी ज्यादा होने की उम्मीद है, लगभग 2 फीसदी ज्यादा. हालांकि, पोडेविल्स का तर्क है कि यह अतिरिक्त लागत सही है. उनके मुताबिक, "यह एक तरह से इंश्योरेंस शुल्क है.”
(The above story first appeared on LatestLY on May 08, 2026 04:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

