जर्मन रिसर्चरों ने बनाया मसूड़ों की बीमारी दूर करने वाला टूथपेस्ट
जिस मसूड़ों की बीमारी को हम मामूली समझकर नजरअंदाज करते हैं, वह चुपचाप पूरी सेहत पर असर डाल रही होती है.
जिस मसूड़ों की बीमारी को हम मामूली समझकर नजरअंदाज करते हैं, वह चुपचाप पूरी सेहत पर असर डाल रही होती है. जर्मनी के फ्राउनहोफर संस्थान के रिसर्चरों ने एक ऐसा टूथपेस्ट बनाया है, जिससे बिना अलग से दवा लिए इलाज हो जाएगा.दांत और मसूड़ों की तकलीफ से तो हम सब वाकिफ हैं. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की मानें तो भारत में दांतों की सड़न (डेंटल केरिज) और मसूड़ों की बीमारी (पेरियोडोंटाइटिस) बहुत आम है. इस रिपोर्ट के अनुसार लगभग 51 फीसदी भारतीय वयस्क किसी ना किसी प्रकार की मसूड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं.
हम इंसानों के मुंह में करोड़ों‑अरबों बैक्टीरिया रहते हैं. इन बैक्टीरिया की लगभग 700 प्रजातियां होती हैं, जो खान‑पान, आदतों और उसके माहौल के अनुसार हर किसी में अलग‑अलग हो सकती हैं. ज्यादातर बैक्टीरिया हमें नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इनमें से कुछ हानिकारक बैक्टीरिया मसूड़ों की बीमारी का कारण बन सकते हैं.
ये बैक्टीरिया दांतों पर जमी परत (प्लाक) में, विशेष रूप से मसूड़ों की लाइन के पास, इकट्ठा होकर सूजन पैदा करते हैं. अगर मसूड़ों की सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो यह लंबी चलने वाली मसूड़ों की बीमारी (क्रॉनिक पेरियोडॉन्टाइटिस) का रूप ले सकती है. जब यही हानिकारक बैक्टीरिया खून में मिल जाते हैं, तो डायबिटीज, गठिया, दिल की बीमारी और भूलने की बीमारी जैसी तकलीफों का खतरा बढ़ा सकते हैं.
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इलाज के बाद भी मसूड़ों की बीमारी क्यों लौट आती है?
हम रोजमर्रा की जिंदगी में दांत और मुंह की सफाई के लिए सामान्य टूथपेस्ट और माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं. इनमें कई बार अल्कोहल वाले माउथवॉश और क्लोरहेक्सिडिन जैसे एंटीसेप्टिक वाले ओरल केयर उत्पाद भी शामिल होते हैं. ऐसे उत्पाद हानिकारक बैक्टीरिया को मारते तो जरूर हैं, लेकिन साथ-साथ अच्छे बैक्टीरिया को भी खत्म कर देते हैं. बाद में जब मुंह में बैक्टीरिया दोबारा बनते हैं, तो हानिकारक बैक्टीरिया जैसे ‘पोर्फाइरोमोनास जिंजिवालिस‘ जल्दी बढ़ जाते हैं, खासकर सूजे हुए मसूड़ों में. वहीं, अच्छे बैक्टीरिया को बनने में वक्त थोड़ा ज्यादा लगता है. यही वजह है कि मुंह का संतुलन बिगड़ता है और बीमारी जल्दी ही लौट आती है.
अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट होने से बचाने के लिए जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट फॉर सेल थेरेपी एंड इम्यूनोलॉजी की हाले शाखा के शोधकर्ताओं ने एक विशेष पदार्थ खोज निकाला है. यह 'पोर्फाइरोमोनास जिंजिवालिस' जैसे हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है और अन्य बैक्टीरिया को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता. इस पदार्थ का नाम 'गुआनिडिनो‑एथाइल‑बेंजाइल‑अमीनो इमिडाजोपाइरीडीन एसीटेट' है. यह नाम बोलने में थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन, इसका काम उतना ही अहम है.
फ्राउनहोफर की मॉलिक्यूलर ड्रग बायोकैमिस्ट्री एंड थेरेपी डेवलपमेंट शाखा के प्रमुख डॉ. स्टीफन शिलिंग बताते हैं, "यह पदार्थ जिंजिवाइटिस पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने के बजाय उनके विकास को रोक देता है. जब वे निष्क्रिय हो जाते हैं, तो अच्छे बैक्टीरिया को उस जगह पर पनपने का मौका मिलता है, जहां वह आम तौर पर नहीं पहुंच पाते. इस तरह यह पदार्थ मुंह में बैक्टीरिया का संतुलन प्राकृतिक तरीके से दोबारा ठीक करता है.”
एक सोच से प्रॉडक्ट तक का सफर
फ्राउनहोफर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पदार्थ के खोज की तकनीक को 'पेरियोट्रैप' का नाम दिया गया. यह तकनीक एक ऐसे प्रोजेक्ट से विकसित हुई, जिसे यूरोपीय संघ ने वित्तीय सहायता दी थी और जिसमें कई देशों के साझेदार भी शामिल थे. वर्ष 2018 में इस पदार्थ की खोज को एक ओरल केयर प्रॉडक्ट का रूप देने के लिए पेरिओट्रैप फार्मा नामक कंपनी स्थापित की गई. इसी के तहत इस कंपनी ने फ्राउनहोफर संस्थानों के साथ मिलकर एक माइक्रोबायोम‑अनुकूल टूथपेस्ट विकसित किया है, जो मुंह के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. कंपनी के सह‑संस्थापक मिर्को बुकहोल्स के अनुसार, "यह टूथपेस्ट पेरियोडोंटाइटिस से बचाव के लिए बनाया गया है और इसमें आम टूथपेस्ट की तरह फ्लोराइड और सफाई करने वाले तत्व मौजूद हैं.”
इसे एक उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद माना जा रहा है. इस प्रॉडक्ट की गुणवत्ता के बारे में डॉ. स्टीफन शिलिंग कहते हैं, "इस उत्पाद के निर्माण में गुणवत्ता मानक ‘जीएलपी‘ का पालन बेहद जरुरी था. हमने सिर्फ नई सामग्री वाला टूथपेस्ट नहीं बनाया, बल्कि मेडिकल‑ग्रेड गुणवत्ता वाला पूरा ओरल केयर समाधान बनाया है.”
दिल के दौरों से कैसे जुड़ी है मसूड़ों की बीमारी?
इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, भारत में मसूड़ों की समस्या को लेकर कम जागरूकता ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखी जाती है. दांतों से खून आना, खाना चबाने में दर्द, मसूड़ों में सूजन(जिंजीवाइटिस) और मसूड़ों के कमजोर होने से हिलते हुए दांत जैसे लक्षण मसूड़ों की बीमारी का संकेत देते है. लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द मानसिक और शारीरिक जीवन को कमजोर कर देता है
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के सर्कुलेशन नामक जर्नल की 2026 के एक बड़े अध्ययन के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया कि जिन लोगों को मसूड़ों की गंभीर बीमारी होती है, उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है. यह खतरा अन्य कारकों को हटाने के बाद भी बना रहता है, जिससे मसूड़ों की बीमारी और हार्ट अटैक के बीच सीधा संबंध होने के संकेत मिलते हैं. यानी दांतों और मसूड़ों की सेहत को बनाए रखने के तरीकों के बारे में जागरूक होना बेहद जरूरी है. हालांकि, सच यह भी है कि कभी‑कभी हमारी पूरी कोशिशें भी नाकाम हो जाती हैं. तब इलाज ही एकमात्र रास्ता बचता है.
पेरियोट्रैप तकनीक का इस्तेमाल कर आगे भी ओरल और डेंटल केयर के नए उत्पाद बनाने की योजना है. उदाहरण के तौर पर, शोधकर्ता वर्तमान में एक विशेष माउथवॉश विकसित कर रहे हैं और साथ ही अन्य क्षेत्रों के बाजारों के लिए भी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. तकनीक का विकास अभी भी जारी है. दंत चिकित्सा में इसके उपयोग को ध्यान में रखते हुए, पेरियोट्रैप की टीम ने फ्राउनहोफर संस्थानों के साथ मिलकर एक विशेष केयर जेल भी बनाया है, जिसे दांतों की पेशेवर सफाई के बाद लगाया जाता है. यह जेल हानिकारक बैक्टीरिया को ब्लॉक करता है, मुंह के माइक्रोबायोम को संतुलित रखता है और मसूड़ों की सेहत भी बनाए रखता है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 07, 2026 04:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

