नई दिल्ली: भारत और चीन (China) को एशिया की "डबल इंजन" ताकत कहा जाता है. ऐसे में जब अमेरिका ने भारत पर 50% तक का टैरिफ (Tariff) लगा दिया, तो चीन ने खुलकर भारत का समर्थन किया. चीन के भारत में राजदूत शू फेइहोंग (Xu Feihong) ने अमेरिका (US) को "बदमाश" करार देते हुए कहा कि चुप्पी साध लेना केवल उसे और ताकतवर बनाएगा. शू फेइहोंग ने कहा कि अमेरिका ने लंबे समय तक फ्री-ट्रेड (Free Trade) से फायदा उठाया है, लेकिन अब वही टैरिफ को सौदेबाजी के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर 50% तक का शुल्क लगाया है, जिसमें 25% सामान्य व्यापार शुल्क और 25% रूस से तेल खरीदने पर पेनल्टी शामिल है.
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भारत-चीन का आपसी सहयोग
राजदूत ने कहा कि अगर भारत और चीन एक-दूसरे के बाजारों को खोलें तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था "1+1=2" से भी ज्यादा प्रभाव डाल सकती है. भारत को IT, सॉफ्टवेयर और बायोमेडिसिन में बढ़त है. चीन इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और न्यू एनर्जी सेक्टर में आगे है. दोनों की साझेदारी से एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिल सकता है.
निवेश और व्यापारिक माहौल
शू फेइहोंग ने कहा कि चीन चाहता है कि भारतीय कंपनियां चीन में निवेश करें. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत चीनी कंपनियों के लिए भी एक निष्पक्ष और भेदभाव-रहित व्यापारिक माहौल उपलब्ध कराएगा, ताकि दोनों देशों के उद्योग साथ मिलकर आगे बढ़ सकें और जनता को लाभ मिले.
अमेरिका-भारत विवाद की जड़
अमेरिका का कहना है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर रूस-यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है. इसी वजह से 27 अगस्त से भारत पर अतिरिक्त शुल्क लागू होगा. लेकिन इस पर चीन का कहना है कि भारत के साथ खड़े होकर वह अमेरिका को कड़ा जवाब देगा.













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