हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को बरी कर दिया जिसे लगभग तीन दशक पहले अपनी पत्नी की आत्महत्या के लिए कथित तौर पर दोषी ठहराया गया था. जस्टिस जेके माहेश्वरी और अरविंद कुमार की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए केवल उत्पीड़न या तनावपूर्ण संबंधों के आरोप ही पर्याप्त नहीं हैं, जो आत्महत्या के लिए उकसाने को अपराध बनाती है. शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए दोषसिद्धि के लिए वैवाहिक संबंधों में पिछले झगड़ों या भावनात्मक तनाव से कहीं अधिक की आवश्यकता होती है. आदेश पारित करते हुए, शीर्ष अदालत ने इस आधार पर ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के निष्कर्षों को खारिज कर दिया कि यह साबित करने के लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं था कि आरोपी ने मृतक को अपनी जान लेने के लिए उकसाया या जानबूझकर मजबूर किया. यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने कब-कब पलटे महिलाओं से जुड़े विवादित फैसले
"पिछले झगड़ों और वैवाहिक तनाव के आधार पर किसी व्यक्ति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता" - सुप्रीम कोर्ट
Man can't be convicted for abetment of wife's suicide based only on past quarrels, strain in marriage: Supreme Court
report by @AdvRitwik https://t.co/CyjKUkJ6Vr
— Bar and Bench (@barandbench) April 7, 2025
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