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Coliform Bacteria: दूध की शुद्धता पर सवाल, Amul, Mother Dairy और Country Delight के सैंपल लैब टेस्ट में फेल; जानें क्या है कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का खतरा

एक स्वतंत्र लैब टेस्ट रिपोर्ट में भारत के प्रमुख डेयरी ब्रांड्स के पाउच वाले दूध में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और उच्च टीपीसी (TPC) स्तर पाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अमूल, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट जैसे ब्रांड्स के कुछ सैंपल सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं.

Coliform Bacteria: दूध की शुद्धता पर सवाल, Amul, Mother Dairy और Country Delight के सैंपल लैब टेस्ट में फेल; जानें क्या है कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का खतरा
दूध/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

मुंबई: भारत के प्रमुख डेयरी ब्रांड्स (Dairy Brands)—अमूल (Amul), मदर डेयरी (Mother Dairy) और कंट्री डिलाइट (Country Delight) के पाउच वाले दूध (Milk) की शुद्धता को लेकर एक ताजा रिपोर्ट ने देश भर के उपभोक्ताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है. टेस्टिंग प्लेटफॉर्म 'Trustified' द्वारा की गई एक स्वतंत्र जांच में दावा किया गया है कि इन ब्रांड्स के दूध के सैंपल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (ood Safety and Standards Authority of India) (FSSAI) द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण किए गए नमूनों में हानिकारक 'कोलीफॉर्म बैक्टीरिया' (Coliform Bacteria) की उपस्थिति और उच्च 'टोटल प्लेट काउंट' (Total Plate Counts) (TPC) पाया गया है. यह भी पढ़ें: Adulterated Milk: आगरा में मिलावटी दूध के अवैध कारोबार का भंडाफोड़, UPFDA ने कार्रवाई करते हुए एकत्र किए नमूने

क्या है कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और यह कितना खतरनाक है?

कोलीफॉर्म बैक्टीरिया सूक्ष्मजीवों का एक समूह है जो आमतौर पर पर्यावरण, मिट्टी, पानी और गर्म खून वाले जानवरों के पाचन तंत्र में पाया जाता है. डेयरी उद्योग में, इनकी उपस्थिति को "हाइजीन फेलियर" (स्वच्छता की कमी) का संकेत माना जाता है.

हालांकि कोलीफॉर्म के अधिकांश स्ट्रेन सीधे तौर पर गंभीर बीमारी नहीं फैलाते, लेकिन पाश्चुरीकृत (Pasteurized) दूध में इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि उत्पादन या वितरण के दौरान गंदगी रही है. उच्च कोलीफॉर्म स्तर होने पर ई. कोली (E. coli) या साल्मोनेला जैसे घातक रोगजनकों की मौजूदगी की संभावना काफी बढ़ जाती है.

ट्रस्टिफाइड (Trustified) रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

लैब टेस्ट के परिणामों को दो मुख्य मापदंडों के आधार पर श्रेणीबद्ध किया गया है:

  • Amul Taaza और Amul Gold: रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों पाउच वेरिएंट्स में कोलीफॉर्म का स्तर FSSAI की सुरक्षित सीमा से अधिक पाया गया. हालांकि, अमूल के UHT टेट्रा पैक सैंपल पूरी तरह सुरक्षित पाए गए.
  • Mother Dairy (गाय का दूध): इस सैंपल में 'टोटल प्लेट काउंट' (TPC) सुरक्षित सीमा से लगभग आठ गुना अधिक (2,40,000 CFU/ml) रिकॉर्ड किया गया, जबकि मानक सीमा केवल 30,000 CFU/ml है.
  • Country Delight: 'खेत से सीधे घर तक' की शुद्धता का दावा करने वाले इस ब्रांड के सैंपल में भी TPC का स्तर कानूनी सीमा से लगभग दोगुना पाया गया.

कंपनियों और विशेषज्ञों का तर्क

डेयरी कंपनियों ने अक्सर ऐसे निष्कर्षों को 'भ्रामक' बताते हुए अपने गुणवत्ता प्रोटोकॉल का बचाव किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि लैब टेस्ट के परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि सैंपल को लैब तक कैसे पहुँचाया गया. यदि दूध के पाउच को वितरण के दौरान $4^\circ\text{C}$ से कम तापमान पर नहीं रखा जाता है, तो बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, भले ही फैक्ट्री से निकलते समय दूध पूरी तरह शुद्ध रहा हो.

उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पाश्चुरीकृत दूध आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन कोल्ड चेन (शीतलन प्रक्रिया) में खराबी के कारण बैक्टीरिया पनप सकते हैं. उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि दूध को खरीदने के तुरंत बाद उचित रेफ्रिजरेशन में रखें. उपभोग से पहले दूध को उबालने की पारंपरिक पद्धति अपनाएं, जो माइक्रोबियल विकास को खत्म करने में एक सुरक्षा कवच का काम करती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 11, 2026 02:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).