Swami Vivekananda Jayanti 2026 Quotes: स्वामी विवेकानंद जयंती पर दोस्तों-रिश्तेदारों संग शेयर करें उनके ये 10 प्रेरणादायी विचार
स्वामी विवेकानंद के जीवन का टर्निंग पॉइंट 1881 में आया, जब उनकी मुलाकात कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में रामकृष्ण परमहंस से हुई. गुरु के मार्गदर्शन में ही उन्होंने वेदांत और आध्यात्मिकता के सार को समझा और उसे आधुनिक विश्व के सामने प्रस्तुत किया. उनकी जयंती पर आप इन विचारों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं.
Swami Vivekananda Jayanti 2026 Quotes in Hindi: भारत के महानतम आध्यात्मिक गुरु और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती (Swami Vivekananda Jayanti) को हर साल 12 जनवरी को देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे विवेकानंद जी के विचार आज भी करोड़ों लोगों को नई दिशा दे रहे हैं. भारत सरकार द्वारा उनकी जयंती को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है, जो उनके उस विश्वास को समर्पित है कि युवा ही राष्ट्र के भाग्य विधाता हैं.
स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था. उनके पिता विश्वनाथ दत्त कोलकाता हाईकोर्ट के वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी एक धार्मिक महिला थीं. नरेंद्रनाथ बचपन से ही मेधावी थे और उनका मन ध्यान व योग में अधिक रमता था. मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग कर सन्यास धारण कर लिया.
स्वामी विवेकानंद के जीवन का टर्निंग पॉइंट 1881 में आया, जब उनकी मुलाकात कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में रामकृष्ण परमहंस से हुई. गुरु के मार्गदर्शन में ही उन्होंने वेदांत और आध्यात्मिकता के सार को समझा और उसे आधुनिक विश्व के सामने प्रस्तुत किया. उनकी जयंती पर आप इन विचारों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: Swami Vivekananda Jayanti 2026: स्वामी विवेकानंद जयंती! युवाओं के लिए प्रेरणा और संकल्प का महापर्व, जानें उनसे जुड़ी रोचक बातें










अक्सर लोग मानते हैं कि उन्हें यह नाम उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने दिया था, लेकिन इतिहास के पन्ने कुछ और ही कहते हैं. फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां की पुस्तक के अनुसार, सन 1891 में जब विवेकानंद शिकागो के 'विश्व धर्म संसद' में जाने वाले थे, तब उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे. राजपूताना के खेतड़ी नरेश ने उनकी यात्रा का सारा खर्च उठाया. खेतड़ी नरेश के सुझाव पर ही नरेंद्रनाथ दत्त ने 'स्वामी विवेकानंद' नाम स्वीकार किया और इसी नाम से उन्होंने दुनिया भर में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप छोड़ी.
स्वामी विवेकानंद ने कम आयु में ही दमा और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों का सामना किया था. आध्यात्मिक शक्ति के धनी विवेकानंद ने अपने अंत समय की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी. उन्होंने कहा था कि वे 40 वर्ष की आयु भी पूरी नहीं कर पाएंगे. उनकी यह बात सच साबित हुई और 4 जुलाई 1902 को महज 39 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 12, 2026 06:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

