Saraswati Puja 2026 Wishes: सरस्वती पूजा के इन भक्तिमय हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
सरस्वती पूजा के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जो वसंत ऋतु और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं. सरस्वती पूजा के पावन अवसर पर शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है. ऐसे में आप भी इन भक्तिमय हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को भेजकर सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Saraswati Puja 2026 Wishes in Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 23 जनवरी 2026 को विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा का महापर्व मनाया जा रहा है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ‘सरस्वती पूजा’, (Saraswati Puja) 'बसंत पंचमी' (Basant Panchami) और 'श्री पंचमी' (Shree Panchami) के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, जिसके बाद मूक पड़े ब्रह्मांड को वाणी और संगीत प्राप्त हुआ. देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में इस दिन बाप्पा के बाद प्रथम पूजनीय मां शारदा की वंदना की जाती है.
दरअसल, माघ मास की गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन मां सरस्वती की आराधना की जाती है. ज्योतिषियों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में मां सरस्वती की पूजा करने से साधक को न केवल व्यावहारिक ज्ञान, बल्कि आध्यात्मिक और अखंड ज्ञान की भी प्राप्ति होती है. यह संयोग उन छात्रों और साधकों के लिए अत्यंत शुभ है जो शिक्षा या अनुसंधान के क्षेत्र में सफलता पाना चाहते हैं.
सरस्वती पूजा के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जो वसंत ऋतु और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं. सरस्वती पूजा के पावन अवसर पर शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है. ऐसे में आप भी इन भक्तिमय हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स को भेजकर सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





गौरतलब है कि बाप्पा की तरह ही मां शारदा को भी पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें पीले पुष्प, पीले फल (जैसे बेर), और केसरिया मीठे चावल या बूंदी का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि पीले रंग के उपयोग से गुरु ग्रह भी मजबूत होता है, जो ज्ञान और भाग्य का कारक है. बसंत पंचमी को एक 'अबूझ मुहूर्त' माना गया है. छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत करने यानी 'विद्यारंभ' संस्कार के लिए यह साल का सबसे श्रेष्ठ दिन है. इस दिन संगीतकार अपने वाद्य यंत्रों की और छात्र अपनी पुस्तकों की पूजा करते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 23, 2026 06:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

