Saraswati Puja 2026 Sanskrit Wishes: हिंदू धर्म में ज्ञान, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती (Maa Saraswati) की आराधना को समर्पित 'बसंत पंचमी' (Basant Panchami) यानी सरस्वती पूजा का पर्व इस साल 23 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार न केवल ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रतीक है, बल्कि यह वह दिन भी है जब ब्रह्मांड को स्वर और वाणी मिली थी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जब संसार की रचना की, तो उन्हें चारों ओर मौन और नीरसता का आभास हुआ.
अपनी रचना से असंतुष्ट होकर उन्होंने भगवान विष्णु और शिव की अनुमति ली और अपने कमंडल से पृथ्वी पर जल छिड़का. जल की बूंदें गिरते ही पृथ्वी पर कंपन हुआ और एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वरद मुद्रा में था. देवी के वीणा वादन करते ही संसार को ध्वनि प्राप्त हुई. उनके इसी प्राकट्य दिवस को 'सरस्वती पूजा' के रूप में मनाया जाता है.
सरस्वती पूजा के शुभ अवसर पर श्रद्धालु पारंपरिक पूजा के साथ-साथ संस्कृत के श्लोकों के जरिए एक-दूसरे को आध्यात्मिक बधाई संदेश भेज रहे हैं. इस दिन संस्कृत भाषा में शुभकामना संदेश भेजने का विशेष महत्व है, क्योंकि संस्कृत को देवभाषा और मां सरस्वती की प्रिय भाषा माना जाता है. ऐसे में आप भी इन संस्कृत विशेज, श्लोक, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों से शुभ सरस्वती पूजा कह सकते हैं.





बसंत पंचमी के दिन को 'अबूझ मुहूर्त' या स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है. इसका अर्थ है कि इस दिन गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत या बच्चों का अक्षर ज्ञान शुरू करने के लिए किसी विशेष ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती. इस तिथि को ऋषि पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है.
सरस्वती पूजा के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है. लोग न केवल पीले वस्त्र धारण करते हैं, बल्कि मां शारदा को पीले फूल, पीला चंदन और केसरिया हलवा भी अर्पित करते हैं. इस दिन देवी सरस्वती के साथ-साथ भगवान विष्णु और प्रेम के देवता कामदेव की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन भक्तिभाव से मंत्रोच्चार करने से एकाग्रता और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है.











QuickLY