Basant Panchami 2026 Messages in Hindi: आज (23 जनवरी 2026) देशभर में बसंत पंचमी (Basant Panchami) का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार पूरी तरह से विद्या और कला की देवी मां सरस्वती (Maa Saraswati) को समर्पित है. आज के दिन को 'श्री पंचमी' और 'सरस्वती पूजा' (Saraswati Puja) के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि आज ही के दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, जिससे समस्त ब्रह्मांड को वाणी और ध्वनि का उपहार मिला.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती हाथों में वीणा, पुस्तक और माला लिए श्वेत कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुई थीं. यही कारण है कि संगीत, शिक्षा और कला से जुड़े लोग आज के दिन को विशेष महत्व देते हैं. शिक्षण संस्थानों और घरों में सुबह से ही मां शारदा की वंदना की जा रही है. लोग पीले वस्त्र धारण कर रहे हैं और देवी को पीले फूल, पीले फल और केसरिया मिठाई का भोग अर्पित कर रहे हैं.
आज सुबह से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'हैप्पी बसंत पंचमी' के संदेशों की धूम मची हुई है और लोग आकर्षक जीआईएफ शुभकामना संदेशों को अपनों के साथ शेयर कर रहे हैं. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को भेजकर प्रियजनों से हैप्पी बसंत पंचमी कह सकते हैं.





ज्योतिष शास्त्र में बसंत पंचमी को 'अबूझ मुहूर्त' की श्रेणी में रखा गया है. इसका अर्थ यह है कि आज का पूरा दिन किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ है. छोटे बच्चों का 'विद्यारंभ' (अक्षर ज्ञान) कराने, संगीत की शिक्षा शुरू करने या गृह प्रवेश जैसे कार्यों के लिए आज किसी विशेष मुहूर्त के चुनाव की आवश्यकता नहीं होती. माना जाता है कि आज के दिन पूजा करने से मां सरस्वती के साथ-साथ मां लक्ष्मी और मां काली का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
बसंत पंचमी का दिन न केवल धार्मिक बल्कि प्राकृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है; आज से 'ऋतुराज' वसंत की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है. कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति में एक नई ऊर्जा का संचार होता है और खेतों में पीली सरसों लहलहाने लगती है. पीला रंग बसंत का मुख्य रंग है, जो ऊर्जा, आशा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.













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