Shiv Jayanti 2026 Marathi Wishes: शिव जयंती के इन मराठी Quotes, WhatsApp Messages, GIF Greetings के जरिए छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती की दें शुभकामनाएं
हर साल 19 फरवरी के अलावा फाल्गुन शुक्ल तृतीया तिथि पर भी छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है. खासकर, डिजिटल युग में शिव जयंती मनाने के लिए लोग शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी करते हैं. ऐसे में आप भी इन खास अवसर पर इन मराठी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए शिव जयंती की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Shiv Jayanti 2026 Marathi Wishes: मराठा साम्राज्य के संस्थापक और कुशल रणनीतिकार छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती (Chhattrapati Shivaji Maharaj Jayanti) हर वर्ष पूरे उत्साह के साथ मनाई जाती है. महाराष्ट्र सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर 19 फरवरी को शिवाजी महाराज (Shivaji Maharaj) की जन्म तिथि के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसके उपलक्ष्य में राज्य भर में सार्वजनिक अवकाश रहता है. यद्यपि हिंदू पंचांग के अनुसार उनकी जयंती फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जो इस साल 6 मार्च 2026 को है, लेकिन आधिकारिक आयोजन 19 फरवरी को ही किए जाते हैं. शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक प्रखर प्रशासक और अर्थशास्त्री भी थे. उनका प्रबंधन कौशल आज भी आधुनिक 'मैनेजमेंट' के छात्रों के लिए अध्ययन का विषय है.
उन्होंने अपने से कहीं अधिक शक्तिशाली शत्रुओं को मात देने के लिए अनुकूल भूभाग और त्वरित हमलों की इस तकनीक का प्रभावी उपयोग किया. उन्होंने समुद्र के महत्व को समझा और 'ज्यापाशी आरमार, त्याचा समुद्र' (जिसके पास नौसेना, उसी का समुद्र) का नारा देते हुए शक्तिशाली नौसेना का निर्माण किया. उन्होंने स्वराज्य की सुरक्षा के लिए सैकड़ों किलों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया, जिससे मराठा साम्राज्य को अभेद्य सुरक्षा कवच मिला.
हर साल 19 फरवरी के अलावा फाल्गुन शुक्ल तृतीया तिथि पर भी छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है. खासकर, डिजिटल युग में शिव जयंती मनाने के लिए लोग शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी करते हैं. ऐसे में आप भी इन खास अवसर पर इन मराठी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए शिव जयंती की शुभकामनाएं दे सकते हैं.






शिवाजी महाराज का शासन 'प्रजा के हित' पर आधारित था. उनके पत्राचार और फरमानों में यह स्पष्ट झलकता है कि वे किसानों के प्रति कितने संवेदनशील थे. उनका स्पष्ट निर्देश था कि सैनिक रयते (प्रजा) की फसल या भाजी के डंठल को भी नुकसान न पहुंचाएं. वे न केवल आपदाओं में कर (tax) माफ करते थे, बल्कि बीज और बैलों की खरीद के लिए सहायता भी प्रदान करते थे, जिससे किसान स्वाभिमानी बन सकें.
इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन महाराज के वास्तविक इतिहास को समझने का संकल्प लेना चाहिए. बाबासाहेब पुरंदरे, गजानन मेहेंदळे जैसे इतिहासकारों द्वारा लिखित शिवचरित्र को पढ़कर युवाओं को महाराज के वास्तविक आदर्शों से जुड़ना चाहिए. शिवाजी महाराज के स्वराज में हर धर्म और जाति के लोग सुरक्षित थे. आज के समाज में उसी सामाजिक समरसता को बनाए रखना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 06, 2026 06:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

