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Kanwar Yatra in Pakistan: क्या पाकिस्तान के हिंदू भी कांवड़ यात्रा पर जाते हैं? जानिए पड़ोसी देश में सावन और शिव मंदिर का महत्व

भारत में सावन आते ही शिव भक्ति की लहर दौड़ जाती है. भोलेनाथ के भक्त गंगा नदी से जल लेने के लिए लंबी दूरी की यात्रा पर पैदल निकल पड़ते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में भी भोलेनाथ के भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ सावन मनाते हैं?

Kanwar Yatra in Pakistan: क्या पाकिस्तान के हिंदू भी कांवड़ यात्रा पर जाते हैं? जानिए पड़ोसी देश में सावन और शिव मंदिर का महत्व

Kanwar Yatra in Pakistan: भारत में सावन आते ही शिव भक्ति की लहर दौड़ जाती है. भोलेनाथ के भक्त गंगा नदी से जल लेने के लिए लंबी दूरी की यात्रा पर पैदल निकल पड़ते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में भी भोलेनाथ के भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ सावन मनाते हैं? सावन के महीने में पाकिस्तान के हिंदू श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करते हैं और स्थानीय मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं. हालांकि, भारत जैसी व्यापक कांवड़ यात्रा वहां नहीं होती.

पाकिस्तान के सिंध, कराची, रहीमयार खान जैसे क्षेत्रों में स्थित शिव मंदिरों में सावन के सोमवार को विशेष पूजा की जाती है. वहां के हिंदू श्रद्धालु जल चढ़ाते हैं, व्रत रखते हैं, लेकिन कांवड़ लेकर यात्रा करने की परंपरा भारत जैसी नहीं है.

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क्या कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं?

भारत में कांवड़ यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं और इसमें बहुत बड़ी संख्या में सड़क यात्रा होती है, लेकिन पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और कई बार उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता पूरी तरह से नहीं मिल पाती. सुरक्षा, सामाजिक माहौल और प्रशासनिक कारणों से ऐसी यात्राएं बड़े पैमाने पर नहीं हो पातीं.

पाकिस्तान में ऐसी किसी भी संगठित कांवड़ यात्रा के बारे में जानकारी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है, जो भौगोलिक स्थिति और सीमा पार यात्रा से जुड़ी जटिलताओं के कारण हो सकती है.

कांवड़ यात्रा की जगह क्या करते हैं?

पाकिस्तान में हिंदू मुख्यतः सिंध प्रांत में रहते हैं और होली, दिवाली, जन्माष्टमी आदि जैसे विभिन्न हिंदू त्योहार मनाते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा हिंगलाज माता मंदिर की वार्षिक हिंगलाज यात्रा है, जो बलूचिस्तान में स्थित है, यही धार्मिक यात्रा पाकिस्तान में सबसे बड़ी हिंदू तीर्थयात्रा मानी जाती है.

भले ही पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है, लेकिन वहां भी कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर हैं, जहां आज भी शिवभक्ति की लौ जलती है.

प्राचीन शिव मंदिरों की कहानी

कटासराज मंदिर: यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है. कहा जाता है कि माता सती के निधन के बाद भगवान शिव के आंसू जहां-जहां गिरे, वहां तीर्थ बने. उन्हीं में से एक है कटासराज का ये शिव मंदिर. यहां सावन और महाशिवरात्रि पर खास आयोजन होते हैं.

सिंध प्रांत के उमरकोट में स्थित शिव मंदिर: यह लगभग 1000 साल पुराना है. माना जाता है कि यह मंदिर उसी काल में बना जब भारत में खजुराहो के मंदिर बने थे. यहां के स्थानीय हिंदू समुदाय की आस्था का यह केंद्र है.

मनसेहरा का शिव मंदिर: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में चित्ती गट्टी में स्थित है. इस मंदिर में करीब 2000 साल पुराना शिवलिंग है, जो इतिहास की गहराइयों से जुड़ा है.

कराची का रत्नेश्वर महादेव मंदिर: यह मंदिर भी शिवभक्तों के लिए बहुत खास है. यहां शिव के साथ अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं और सावन में यहां पूजा-पाठ होता है.

सियालकोट का पुराना शिव मंदिर: यह विभाजन से पहले बहुत सक्रिय धार्मिक स्थल हुआ करता था. आज भी यहां के बचे-खुचे हिंदू समुदाय के लोग शिवरात्रि और सावन में श्रद्धा से पूजा करते हैं

भले ही संख्या कम हो, लेकिन श्रद्धा में कोई कमी नहीं. सावन के इस पवित्र महीने में पाकिस्तान के ये मंदिर आज भी शिवभक्ति की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 12, 2025 04:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).