Bumble डेट से जेल तक: कर्नाटक हाई कोर्ट ने BNS की धारा 69 के बढ़ते दुरुपयोग पर जताई चिंता; आरोपी शख्स को तुरंत रिहा करने का दिया आदेश
प्रतीकात्मक तस्वीर (File Photo)

बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट (Karnataka High Court) ने आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों (Consensual S*xual Relationships) को रिश्ते बिगड़ने के बाद आपराधिक रंग देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. मंगलवार (24 फरवरी 2026) को एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) (BNS) की धारा 69 के तहत आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति को अंतरिम राहत देते हुए तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह के मुकदमों की "बाढ़" आना कानून के दुरुपयोग (Legal Misuse) का एक क्लासिक उदाहरण बनता जा रहा है. यह भी पढ़ें: ब्रेकअप का मतलब आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को मिली जमानत

क्या है मामला?

यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है जिसकी मुलाकात शिकायतकर्ता महिला से डेटिंग ऐप 'बम्बल' (Bumble) के जरिए हुई थी. रिश्ता खत्म होने के बाद, महिला ने BNS की धारा 69 के तहत शिकायत दर्ज कराई. महिला का आरोप था कि याचिकाकर्ता ने शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया था.

'धोखाधड़ी' के दावों पर न्यायिक चिंता

भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 को उन लोगों को दंडित करने के लिए लाया गया है जो 'धोखाधड़ी के साधनों' (Deceitful Means) से महिलाओं को यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसमें शादी का झूठा वादा भी शामिल है.

हालांकि, अदालत ने पाया कि कई मामले लंबे समय तक चले आपसी सहमति के संबंधों के विफल होने के बाद ही सामने आते हैं. जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा, 'धारा 69 के लागू होने के बाद से ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. प्रथम दृष्टया यह आपसी सहमति का मामला लग रहा था, फिर भी याचिकाकर्ता को 10 साल की जेल की सजा का सामना करना पड़ रहा है.'

सबूत के तौर पर पेश की गई 'कविता'

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने साक्ष्य के रूप में शिकायतकर्ता महिला द्वारा लिखी गई एक कविता पेश की. वकील का तर्क था कि इन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से और आकस्मिक (Casual) थे. जब बचाव पक्ष के वकील ने मजाकिया लहजे में कहा कि उनका मुवक्किल उस कविता के लिए 'प्रेरणा' (Muse) था, तो जज ने टिप्पणी की कि यदि कानूनी परिणाम इतने गंभीर न होते, तो यह स्थिति मनोरंजक (Amuse) लगती. यह भी पढ़ें: Assam Gangrape Horror: असम के सिलचर में शर्मनाक वारदात, बॉयफ्रेंड के सामने 7 लोगों ने युवती से किया गैंगरेप, जबरन ₹10 हजार की वसूली भी की; 2 गिरफ्तार

गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर कड़ी आलोचना

हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया. कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यह आम हो गया है कि दो-तीन साल के आपसी सहमति के रिश्ते के बाद अपराध दर्ज कराया जाता है और तुरंत गिरफ्तारी हो जाती है.

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, 'केवल इसलिए कि कथित अपराध में 10 साल की सजा का प्रावधान है, राज्य हर आरोपी को तुरंत हिरासत में ले रहा है.' कोर्ट की राय थी कि यह ऐसा मामला नहीं था जहां आरोपी को उसकी स्वतंत्रता से वंचित किया जाना चाहिए था, खासकर तब जब आरोप एक स्वैच्छिक रिश्ते से उपजे हों.

कोर्ट का आदेश और अगली कार्रवाई

याचिकाकर्ता की हिरासत 4 मार्च तक बढ़ा दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे अनुचित मानते हुए उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया. साथ ही, मामले की जांच पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी गई है. यह फैसला नए आपराधिक कानून के तहत 'आपराधिक धोखाधड़ी' और 'विफल व्यक्तिगत रिश्तों' के बीच की धुंधली रेखा को समझने में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा.