Dayanand Saraswati Jayanti 2026: दयानंद सरस्वती की जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी
आज देशभर में आर्य समाज के संस्थापक और महान विचारक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती मनाई जा रही है. 12 फरवरी 2026 को उनकी 202वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक और धार्मिक संस्थानों में उनके द्वारा दी गई 'वैदिक शिक्षा' और 'सामाजिक न्याय' के संदेश को याद किया जा रहा है.
Dayanand Saraswati Jayanti 2026: आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती (Maharishi Dayanand Saraswati) की आज 12 फरवरी 2026 को 202वीं जयंती मनाई जा रही है. 19वीं सदी के भारतीय पुनर्जागरण के नायकों में शुमार स्वामी दयानंद ने न केवल समाज में फैली कुरीतियों पर प्रहार किया, बल्कि 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देकर भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी. आज देशभर के आर्य समाज मंदिरों, डीएवी (DAV) संस्थानों और गुरुकुलों में यज्ञ, भजन और विचार गोष्ठियों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, स्वामी दयानंद की जयंती (Dayanand Saraswati Jayanti) फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है, जो इस वर्ष आज 12 फरवरी को पड़ी है. विशेष रूप से गुजरात के टंकारा (उनका जन्मस्थान) और हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली जैसे राज्यों में बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है.
आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. राष्ट्रपति ने कहा कि दयानंद सरस्वती की ओर से स्थापित आध्यात्मिक व शिक्षण संस्थानों से देश लाभान्वित होता रहा है और सदैव होता रहेगा.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ‘महान संत और समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं. प्राचीन भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के तर्कसंगत स्वरूप का प्रसार करते हुए उन्होंने सम्पूर्ण समाज और देश की शिक्षा पद्धति को अमूल्य दिशानिर्देश दिया.’
राष्ट्रपति मुर्मु ने आगे लिखा, ‘स्वामी दयानंद सरस्वती की ओर से स्थापित आध्यात्मिक व शिक्षण संस्थानों से हमारा देश लाभान्वित होता रहा है और सदैव होता रहेगा. स्वामी दयानंद सरस्वती के दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए सभी देशवासी, भारत को विश्व पटल पर अग्रणी देश के रूप में स्थापित करने का संकल्प लेकर, जीवन में आगे बढ़ें. ‘ यह भी पढ़ें: Chhatrapati Sambhaji Maharaj Balidan Mas 2026 Start Date: 2026 में कब शुरू हो रहा है धर्मवीर संभाजी महाराज का बलिदान मास? जानें तिथि और महत्व
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी श्रद्धांजलि
महान संत एवं समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।प्राचीन भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के तर्कसंगत स्वरूप का प्रसार करते हुए उन्होंने सम्पूर्ण समाज को तथा देश की शिक्षा पद्धति को अमूल्य दिशानिर्देश दिया। उनके द्वारा स्थापित…
— President of India (@rashtrapatibhvn) February 12, 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आर्य समाज की स्थापना और सामाजिक कुरीतियों के त्याग व स्त्री शिक्षा के लिए दयानंद सरस्वती के योगदान को याद किया. उन्होंने लिखा, ‘स्वराज, स्वदेशी व स्वावलंबन के प्रणेता महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की और सामाजिक कुरीतियों के त्याग व स्त्री शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक किया. उन्होंने 'सत्यार्थ प्रकाश' से वैदिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाया. स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन.’
गृहमंत्री अमित शाह ने महर्षि दयानंद सरस्वती को किया नमन
स्वराज, स्वदेशी व स्वावलंबन के प्रणेता महर्षि दयानंद जी ने आर्य समाज की स्थापना की और सामाजिक कुरीतियों के त्याग व स्त्री शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक किया। उन्होंने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ से वैदिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया।
स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। pic.twitter.com/ilk5Fs2xlA
— Amit Shah (@AmitShah) February 12, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दयानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. सीएम योगी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, ‘असीम ज्ञान और उच्च गुणों से सम्पन्न स्वामी जी का पूरा जीवन समाज-उत्थान, राष्ट्र-जागरण और मानव-कल्याण के पावन कार्यों में बीता. उनका तेजस्वी व्यक्तित्व और वैचारिक प्रखरता देश और समाज को सतत नवचेतना व प्रेरणा प्रदान करती रहेगी.’
सीएम योगी आदित्यनाथ ने महर्षि दयानंद सरस्वती को दी श्रद्धांजलि
वैदिक चेतना के महान उद्घोषक एवं आध्यात्मिक चिंतक, आर्य समाज के संस्थापक, महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
असीम ज्ञान और उच्च गुणों से सम्पन्न स्वामी जी का सम्पूर्ण जीवन समाज-उत्थान, राष्ट्र-जागरण और मानव-कल्याण के पावन कार्यों में बीता।
उनका… pic.twitter.com/2d1ZTbuGlp
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 12, 2026
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, ‘सनातन परंपरा के महान प्रेरणास्रोत, आर्य समाज के संस्थापक और समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती की जयंती पर उन्हें सादर नमन. समानता, शिक्षा, जागरूकता और प्रगतिशील विचारों के माध्यम से समतामूलक समाज के निर्माण में उनका अमूल्य योगदान सदैव प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय रहेगा.’
सीएम नायब सिंह सैनी ने महर्षि दयानंद सरस्वती को किया नमन
सनातन परंपरा के महान प्रेरणास्रोत, आर्य समाज के संस्थापक एवं समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
समानता, शिक्षा, जागरूकता और प्रगतिशील विचारों के माध्यम से समतामूलक समाज के निर्माण में उनका अमूल्य योगदान सदैव प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय रहेगा। pic.twitter.com/0P1A2CBPqb
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) February 12, 2026
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दयानंद सरस्वती को नमन करते हुए 'एक्स' पोस्ट में लिखा, ‘औपनिवेशिक काल में भारतीय समाज को आत्मबोध की दिशा देने वाले महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने सामाजिक कुरीतियों, अशिक्षा और भेदभाव के विरुद्ध संगठित वैचारिक आंदोलन का नेतृत्व किया. आर्य समाज की स्थापना के माध्यम से उन्होंने वैदिक मूल्यों पर आधारित समरस, शिक्षित और सशक्त समाज की संकल्पना प्रस्तुत की। उनकी जयंती पर उनके समाजसुधारक विचारों और राष्ट्रोन्मुख दृष्टि का स्मरण.’
अंधविश्वास और कुरीतियों के विरुद्ध शंखनाद
महर्षि दयानंद का जन्म 1824 में गुजरात के टंकारा में हुआ था. उनके बचपन का नाम मूलशंकर था. उन्होंने उस समय के भारतीय समाज में व्याप्त छुआछूत, बाल विवाह, सती प्रथा और मूर्ति पूजा जैसी बुराइयों के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई.
उनका मानना था कि समाज का उत्थान केवल वेदों के ज्ञान और महिलाओं की शिक्षा से ही संभव है. उन्होंने अंतरजातीय विवाह और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन कर समाज में समानता का बीज बोया.
'स्वराज' का पहला उद्घोष
कम ही लोग जानते हैं कि स्वामी दयानंद सरस्वती पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1876 में 'स्वराज' (भारत भारतीयों के लिए) का नारा दिया था, जिसे बाद में लोकमान्य तिलक और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्रीय आंदोलन का मुख्य आधार बनाया. उनकी शिक्षाओं ने लाला लाजपत राय, राम प्रसाद बिस्मिल और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को राष्ट्रवाद की प्रेरणा दी.
शैक्षणिक विरासत: DAV और गुरुकुल
स्वामी जी के निधन के बाद उनकी याद में और उनके विचारों को आगे बढ़ाने के लिए लाहौर में 1886 में पहले 'दयानंद एंग्लो वैदिक' (DAV) स्कूल की स्थापना की गई थी. आज यह संस्था दुनिया के सबसे बड़े गैर-सरकारी शैक्षणिक नेटवर्कों में से एक है. इसके अलावा, प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति को जीवित रखने के लिए उन्होंने कई गुरुकुलों की नींव रखी.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 12, 2026 09:44 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

