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Chhatrapati Sambhaji Maharaj Balidan Mas 2026 Start Date: 2026 में कब शुरू हो रहा है धर्मवीर संभाजी महाराज का बलिदान मास? जानें तिथि और महत्व

2026 में छत्रपति संभाजी महाराज बलिदान मास के महत्व और तिथियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट, जो उनके 40 दिनों के संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में मनाया जाता है.

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Balidan Mas 2026 Start Date: 2026 में कब शुरू हो रहा है धर्मवीर संभाजी महाराज का बलिदान मास? जानें तिथि और महत्व
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Balidan Mas 2026

मराठा साम्राज्य के द्वितीय छत्रपति और 'धर्मवीर' के नाम से विख्यात संभाजी महाराज के सर्वोच्च बलिदान की याद में इस वर्ष भी 'बलिदान मास' श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है. 2026 में यह शोक और वीरता का काल फरवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर मार्च के उत्तरार्ध तक चलेगा. मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब की कैद में रहते हुए संभाजी महाराज ने लगातार 40 दिनों तक अमानवीय यातनाएं सहने के बावजूद अपना धर्म और स्वाभिमान नहीं छोड़ा था. उनके इसी अडिग साहस को नमन करने के लिए शिवभक्त और विभिन्न संगठन इस पूरे महीने सादगी और संयम का पालन करते हैं.

2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और पालन

पंचांग और ऐतिहासिक गणना के अनुसार, 2026 में बलिदान मास मुख्य रूप से 8 फरवरी के आसपास शुरू हुआ है और इसका समापन 18 मार्च 2026 (फाल्गुन अमावस्या) को होगा. इसी दिन महाराज का अंतिम बलिदान दिवस मनाया जाता है.

इस एक महीने की अवधि में महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में 'धारकरी' और शिवभक्त शोक व्यक्त करते हैं. कई लोग इस दौरान जूते नहीं पहनते, मीठा त्याग देते हैं और सादा भोजन करते हैं. शाम के समय मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी शौर्य गाथा का पाठ किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी को उनके बलिदान की गहराई समझ आ सके.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 40 दिनों का असहनीय संघर्ष

इतिहास के अनुसार, 1689 में मुकर्रब खान ने संभाजी महाराज और उनके विश्वासपात्र कवि कलश को संगमेश्वर में धोखे से बंदी बना लिया था. औरंगजेब ने उनके सामने इस्लाम स्वीकार करने और स्वराज्य के खजाने की जानकारी देने जैसी शर्तें रखी थीं.

जब महाराज ने इन शर्तों को ठुकरा दिया, तो उन्हें 40 दिनों तक अत्यंत क्रूर शारीरिक यातनाएं दी गईं. उनकी आंखें निकाल ली गईं और जीभ काट दी गई, फिर भी उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया. अंततः फाल्गुन अमावस्या के दिन उनका सिर कलम कर दिया गया. उनके इसी बलिदान ने मराठा साम्राज्य में नई ऊर्जा का संचार किया और अंततः मुगलों के पतन का मार्ग प्रशस्त किया.

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

वर्तमान में 'बलिदान मास' केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक बन गया है. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस वर्ष भी युवाओं के बीच संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित कार्यक्रमों की धूम है.

विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में इस मास का पालन करने वालों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक युग में भी 'छावा' (शेर का बच्चा) के नाम से मशहूर संभाजी महाराज का इतिहास लोगों को प्रेरित कर रहा है. कई स्थानों पर मूक पदयात्राएं और व्याख्यान आयोजित कर उनके 'स्वधर्म' और 'स्वराज्य' के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 03, 2026 06:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).