Who Is Makhanlal Sarkar? पश्चिम बंगाल में नई सरकार का आगाज, PM मोदी ने 98 वर्षीय दिग्गज नेता माखनलाल सरकार के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, जानें उनके बारे में; VIDEO
(Photo Creditd ANI)

Who Is Makhanlal Sarkar? पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार, 9 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में सुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा भावुक और सम्मानजनक कार्य किया जिसने सबका ध्यान खींच लिया. पीएम मोदी ने पार्टी के सबसे पुराने जीवित नेताओं में से एक, 98 वर्षीय माखनलाल सरकार को गले लगाया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया. सिलीगुड़ी के निवासी माखनलाल सरकार राज्य में राष्ट्रवादी आंदोलन के आधार स्तंभ माने जाते हैं.

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ रहा है गहरा नाता

माखनलाल सरकार भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंतिम जीवित सहयोगियों में से एक हैं. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के अनुसार, सरकार उस समय डॉ. मुखर्जी के साथ थे जब कश्मीर में तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था. 1952 की वह ऐतिहासिक घटना भाजपा और जनसंघ की विचारधारा में मील का पत्थर मानी जाती है. डॉ. मुखर्जी की कश्मीर की जेल में रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मृत्यु के दौरान भी माखनलाल सरकार उनके अंतिम सफर के साक्षी रहे थे.

PM मोदी ने माखनलाल सरकार के छुए पैर 

कोर्ट में देशभक्ति गीत और जज का फैसला

माखनलाल सरकार के जीवन से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा काफी चर्चा में है. कांग्रेस शासन के दौरान उन्हें दिल्ली पुलिस ने देशभक्ति गीत गाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. जब उन्हें अदालत में पेश किया गया और माफी मांगने को कहा गया, तो उन्होंने इनकार कर दिया. उन्होंने जज से कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, केवल गीत गाया है. जब जज ने वह गीत सुना, तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने न केवल सरकार को रिहा किया, बल्कि उन्हें घर वापस जाने के लिए प्रथम श्रेणी का टिकट और 100 रुपये भी दिए.

भाजपा के शुरुआती दौर के शिल्पकार

1980 में भाजपा के औपचारिक गठन के बाद, माखनलाल सरकार ने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे सिलीगुड़ी संगठनात्मक जिले के पहले जिलाध्यक्ष बने और जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग व पश्चिम दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में पार्टी के विस्तार के लिए काम किया. उनकी कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा की स्थापना के महज एक साल के भीतर उन्होंने लगभग 10,000 सदस्यों को जोड़ा था. वे लगातार सात वर्षों तक जिलाध्यक्ष रहे, जो उस समय के सांगठनिक नियमों के हिसाब से एक बड़ी उपलब्धि थी.

राजनीतिक संघर्ष और सम्मान का मेल

प्रधानमंत्री मोदी और इस बुजुर्ग नेता के बीच की यह मुलाकात पार्टी के पुराने संघर्ष और वर्तमान सफलता के बीच एक सेतु की तरह देखी जा रही है. 98 वर्ष की आयु में भी माखनलाल सरकार की उपस्थिति कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है. शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें दिया गया यह विशेष सम्मान उन पीढ़ियों के प्रति श्रद्धांजलि माना जा रहा है, जिन्होंने बंगाल में संगठन की नींव रखने के लिए दशकों तक संघर्ष किया है.