India-Japan Bilateral Talks: पीएम मोदी और जापानी विदेश मंत्री मोतेगी की मुलाकात; मजबूत और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के लिए सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने मंगलवार, 26 मई 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने 'भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को और मजबूत करने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.
नई दिल्ली, 26 मई: हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई मजबूती मिली है. नई दिल्ली में आयोजित 'जापान-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया-भारत' (क्वाड) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत आए जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी (Japanese Foreign Minister Toshimitsu Motegi) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से शिष्टाचार मुलाकात की. लगभग 30 मिनट तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को आगे बढ़ाने में 'भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की. दोनों पक्षों ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत (FOIP) विजन को धरातल पर उतारने के लिए आपसी सहयोग को और अधिक व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की. यह भी पढ़ें: India-Cyprus Bilateral Talks: पीएम मोदी और राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने हैदराबाद हाउस में की मुलाकात, डिफेंस से लेकर AI पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया संतोष: अगले 10 वर्षों के विजन पर प्रगति
जापानी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी प्रसन्नता साझा की. पीएम मोदी ने लिखा, 'जापान के विदेश मंत्री श्री तोशिमित्सु मोतेगी का स्वागत करके बेहद खुशी हुई. हमने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे परे शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि की है.'
जापानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक के दौरान विदेश मंत्री मोतेगी ने रेखांकित किया कि पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान घोषित 'अगले 10 वर्षों के लिए भारत-जापान संयुक्त विजन' के आधार पर दोनों देश सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. वर्तमान में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेश, डिजिटल नवाचार (Innovation) और जन-दर-जन (People-to-People) संपर्क के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय पहलों को सक्रियता से आगे बढ़ाया जा रहा है.
आर्थिक सुरक्षा और निवेश पर विशेष ध्यान
बैठक में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुरक्षित रखने के लिए आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना समय की मांग है. भारत और जापान भविष्य में निवेश, तकनीकी नवाचार और ज्ञान के सुचारू प्रवाह (Knowledge Circulation) के माध्यम से दोनों देशों में ठोस आर्थिक परिणाम हासिल करने के लिए मिलकर काम करेंगे.
जापान ने भारत के बुनियादी ढांचे और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्रों में अपने निवेश को और अधिक विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की है, जिससे दोनों विकासशील और विकसित अर्थव्यवस्थाओं को एक नया संबल मिल सके.
विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात; अगले वर्ष मनेगी राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद जापानी विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ भी विस्तृत प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता की. दोनों विदेश मंत्रियों ने पिछले वर्ष संशोधित किए गए सुरक्षा घोषणापत्र (Security Declaration) के आधार पर रक्षा और सैन्य सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई.
नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आगामी वर्ष (2027) भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ (75th Anniversary of Diplomatic Relations) के रूप में मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाते हुए दोनों देश सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवाओं के बीच संपर्क बढ़ाने के कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर आयोजित करेंगे, जो दोनों देशों के संबंधों की सबसे मजबूत बुनियाद है. यह भी पढ़ें: PM Modi in Italy: पीएम मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने डिनर के बाद ऐतिहासिक कोलोसियम का किया दौरा, तस्वीरें आई सामने
वैश्विक मुद्दों और ऊर्जा सुरक्षा पर रणनीतिक विमर्श
द्विपक्षीय संबंधों के अलावा, डॉ. जयशंकर और मोतेगी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मध्य पूर्व (Middle East) की वर्तमान सुरक्षा स्थिति पर भी गहन विचार-विमर्श किया. दोनों देशों ने वैश्विक व्यापार के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में जहाजों की मुफ्त, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही (Free and Safe Navigation) सुनिश्चित करने के लिए आपस में निरंतर और करीबी संचार बनाए रखने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की.
इसके साथ ही, दोनों मंत्रियों ने दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया (आसियान देशों) में ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने के संकल्प को दोहराया, ताकि किसी भी वैश्विक संकट के समय इन क्षेत्रों की आर्थिक स्थिरता प्रभावित न हो.
(The above story first appeared on LatestLY on May 26, 2026 08:39 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

