UP Assembly Elections 2022: यूपी में सक्रिय हुए असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव के लिए बन सकते हैं बड़ा खतरा
असदुद्दीन ओवैसी (Photo Credits: PTI)

लखनऊ: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में अच्छे प्रदर्शन के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) साल 2022 में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं. यूपी में उनकी पार्टी अपनी सक्रियता बढ़ाने में लगी है. ओवैसी छोटे दलों के साथ मिलकर बड़ी पार्टियों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी में हैं. फिलहाल उनके टारगेट पर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (SP) है. ओवैसी ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा, "प्रदेश में जब अखिलेश यादव की सरकार थी तो हमें 12 बार प्रदेश में आने से रोका गया था.

AIMIM के चीफ अपने मिशन यूपी की शुरुआत पूर्वांचल के दौरे से कर चुके हैं. इस मिशन के लिए ओवैसी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) से हाथ मिलाया है. ओवैसी सूबे के कई छोटे दलों से भी गठजोड़ कर रहे हैं ताकि वे बड़ी पार्टियों को टक्कर दे सकें. UP Assembly Elections 2022: आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में भी आजमाएगी अपनी किस्मत.

ओवैसी ने अखिलेश यादव पर निशाना साध कर यह भी साफ कर दिया है कि वे समाजवादी पार्टी के खिलाफ जंग के मैदान में उतर चुके हैं. उन्होंने स्पष्ट किया था कि समाजवादी पार्टी उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी है. ओवैसी ने यहां तक कहा, 'मैं यहां आ पाया हूं क्योंकि मुझे अनुमति दी गई.' यानी अखिलेश यादव ने अपने राज में उनपर रोक लगाई लेकिन योगी सरकार ने उन्हें अनुमति दी. मायावती का ऐलान, उत्तर प्रदेश-उत्‍तराखंड में BSP अकेले लड़ेगी चुनाव.

इस बीच बीजेपी के साक्षी महाराज ने कहा कि ओवैसी ने बिहार में बीजेपी की मदद की और अब यूपी-बंगाल में भी ऐसा ही होगा. तो क्या वाकई वे समाजवादी पार्टी जैसी यूपी की बड़ी पार्टी के वोट काटेंगे जिसका फायदा बीजेपी को हो सकता है.

ओवैसी की नजर यूपी के मुस्लिम यादव वोटर्स पर है, जिन्हें समाजवादी पार्टी का वोटर कहा जाता है. ओवैसी मुस्लिम समुदाय के साथ ओबीसी वोटर्स को अपनी तरफ लाने की भरपूर कोशिश में हैं और ओवैसी के इस मिशन में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर उनकी बड़ी सहायता कर सकते हैं. राजभर को सूबे की राजनीति का अच्छा ज्ञान है जिसका फायदा ओवैसी चाहते हैं.