नई दिल्ली: कांग्रेस ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुई सीजफायर (युद्धविराम) संधि के बाद इंदिरा गांधी के नेतृत्व को प्रमुखता से दिखाया, जो बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में निर्णायक था. इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि 1971 और 2025 की परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं.
ANI से बातचीत के दौरान जब शशि थरूर से कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर इंदिरा गांधी को प्रमोट करने के अभियान के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने बिना सीधे तौर पर उस पर टिप्पणी किए कहा, "सच्चाई यह है कि, मेरी राय में, हम उस स्थिति तक पहुंच चुके थे जहां संघर्ष अनावश्यक रूप से बढ़ता जा रहा था. शांति हमारे लिए आवश्यक है. 1971 की परिस्थितियां 2025 की परिस्थितियों से बिल्कुल अलग हैं. इसमें अंतर है."
थरूर ने कहा कि भारतीय जनता शांति की हकदार है. "हमने बहुत सहा है, पूंछ के लोगों से पूछिए, कितने लोग मारे गए हैं. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमें युद्ध बंद कर देना चाहिए. जब युद्ध जारी रखने का कारण हो, तो उसे जारी रखना चाहिए. लेकिन यह युद्ध ऐसा नहीं था जिसे हमें जारी रखना था. हम केवल आतंकवादियों को सबक सिखाना चाहते थे. वह सबक सिखा दिया गया है."
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सरकार उस आतंकवादी समूह को पकड़ने की कोशिश करेगी जो पहलगाम आतंकवादी हमले में शामिल थे, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे. "यह जरूरी है. यह एक रात में नहीं होगा, इसमें महीने, साल लग सकते हैं, लेकिन हमें यह करना होगा. किसी को भी भारतीय नागरिकों की हत्या करने के बाद बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम पूरे देश को एक लंबे युद्ध में डाल दें," थरूर ने कहा.
उन्होंने कहा,"जहां तक पाकिस्तान के साथ इस संघर्ष का सवाल है, कोई कारण नहीं था कि हम और अधिक लोगों की जान, शारीरिक क्षति और संपत्ति की जोखिम में डालते. हमें भारतीय लोगों की समृद्धि, विकास और प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. मुझे लगता है कि इस समय शांति ही सही रास्ता है."
#WATCH | Delhi | On the understanding reached between Indian and Pakistan, Congress MP Shashi Tharoor says, "We had reached a stage where the escalation was needlessly getting out of control. Peace is necessary for us. The truth is that the circumstances of 1971 are not the… pic.twitter.com/dowttNX1wj
— ANI (@ANI) May 11, 2025
उन्होंने कहा, कांग्रेस नेता ने 1971 की विजय को एक "महान उपलब्धि" बताते हुए कहा कि यह उन्हें एक भारतीय के रूप में गर्वित करता है. "इंदिरा गांधी जी ने उपमहाद्वीप का नक्शा फिर से लिखा. लेकिन परिस्थितियां अलग थीं. आज का पाकिस्तान अलग स्थिति में है. उनके पास जो सैन्य साजो-सामान है, जो क्षति वे पहुंचा सकते हैं, वह सब कुछ अलग है."
थरूर ने कहा, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में, उन्होंने कहा कि भारत एक नैतिक कारण के लिए युद्ध कर रहा था, ताकि लोगों को स्वतंत्रता मिल सके. "यह एक अलग कहानी है. हम दोनों पक्षों के बीच बहुत बड़ी हानि के साथ एक लंबा और खींचा हुआ संघर्ष कर सकते थे. क्या यह आज भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है? नहीं, यह नहीं है. हम उन लोगों को यह सिखाना चाहते थे जिन्होंने इन आतंकवादियों को भेजा था कि इसका एक मूल्य चुकाना पड़ता है."
#WATCH | Delhi | "1971 was a great achievement, Indira Gandhi rewrote the map of the subcontinent, but the circumstances were different. Bangladesh was fighting a moral cause, and liberating Bangladesh was a clear objective. Just keeping on firing shells at Pakistan is not a… pic.twitter.com/Tr3jWas9Ez
— ANI (@ANI) May 11, 2025
सीजफायर समझौते की घोषणा के बाद कांग्रेस नेताओं ने इंदिरा गांधी की तस्वीरें साझा की, जो 1971 युद्ध में देश की जीत की अगुआई कर रही थीं. इन पोस्टों को प्रधानमंत्री मोदी पर हमला माना गया. भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सवाल उठाया कि कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की याद क्यों नहीं आई और पूछा कि मुंबई के 26/11 आतंकवादी हमलों के बाद यूपीए सरकार ने क्या कदम उठाए थे.
कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री द्वारा युद्धविराम संधि पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा "तटस्थ स्थान" का उल्लेख करने पर सरकार ने कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दरवाजे खोल दिए हैं या नहीं.
अंत में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कहा, "यह स्वाभाविक है कि देश इंदिरा गांधी को 1971 में उनके असाधारण साहसिक और दृढ़ नेतृत्व के लिए याद करता है."













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