नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 24 मई को जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके का दौरा करेंगे. इस दौरे का मकसद है हाल ही में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों से मिलना और उनका हालचाल जानना. इसकी जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दी.
राहुल गांधी का यह जम्मू-कश्मीर का दूसरा दौरा होगा. इससे पहले वे 25 अप्रैल को श्रीनगर पहुंचे थे, जहां उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में घायल लोगों से मुलाकात की थी. उस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक की जान गई थी.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए लिखा, "लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री @RahulGandhi कल 24 मई को पुंछ का दौरा करेंगे. वहां वे हालिया पाकिस्तान की गोलाबारी में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों से मिलेंगे."
पिछले महीने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि आतंकवादी हमलों का मकसद देश को बांटना है, लेकिन भारत को एकजुट रहकर आतंकवाद को हराना होगा.
लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री @RahulGandhi कल यानी 24 मई को पुंछ का दौरा करेंगे, जहां वे हाल ही में पाकिस्तान की गोलाबारी में मारे गए लोगों के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात करेंगे।
इससे पहले, 25 अप्रैल को वे श्रीनगर गए थे, जहां उन्होंने पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले में घायल…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 23, 2025
पुंछ में क्या हुआ?
पुंछ सेक्टर में दो हफ्ते पहले पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी की गई थी. यह गोलाबारी तब शुरू हुई जब भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाकर सटीक हमले किए थे. इसमें जैश-ए-मोहम्मद (बहावलपुर) और लश्कर-ए-तैयबा (मुरीदके) जैसे आतंकी संगठनों के मुख्यालय शामिल थे.
इसके जवाब में पाकिस्तान ने 8 से 10 मई के बीच पुंछ समेत जम्मू क्षेत्र में रॉकेट, ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया. इन हमलों में 27 लोग मारे गए और 70 से अधिक घायल हुए. सैकड़ों परिवार अपनी जान बचाकर राहत शिविरों में पहुंचे.
भारत और पाकिस्तान के बीच यह तनाव 10 मई को बातचीत के जरिए थमा, जब दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई.
राहुल गांधी की यह यात्रा क्यों अहम है?
राहुल गांधी का पुंछ दौरा केवल एक राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि यह उन पीड़ित परिवारों को सहानुभूति और समर्थन देने की कोशिश है, जो अचानक आई इस त्रासदी से जूझ रहे हैं. विपक्ष के नेता के तौर पर उनका यह कदम यह भी दिखाता है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में राजनीतिक दल एकजुट होकर देश के लोगों के साथ खड़े हैं.













QuickLY