Court Cases in India: भारतीय अदालतों में लंबित मामलों का अंबार, 4.76 करोड़ से अधिक केस पेंडिंग; सुप्रीम कोर्ट में आंकड़ा 92 हजार के पार
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (Photo Credits: Facebook)

नई दिल्ली: भारत की न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों (Pending Cases) का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है. केंद्र सरकार (Union Government) ने शुक्रवार को लोकसभा में सूचित किया कि देश की विभिन्न अदालतों में वर्तमान में 4.76 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं. इसमें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 92,101 और विभिन्न उच्च न्यायालयों के 63.66 लाख से अधिक मामले शामिल हैं. कानून और न्याय मंत्रालय ने नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid) (NJDG) के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी साझा की. कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) (Minister of State (Independent Charge) for Law and Justice) अर्जुन राम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) ने एक लिखित उत्तर में बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 92,101 तक पहुंच गई है. पिछले तीन वर्षों में शीर्ष अदालत में लंबित मामलों में 11.40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

इसी तरह, देश के 25 उच्च न्यायालयों में 63,66,023 मामले लंबित हैं, जो पिछले तीन वर्षों में 4.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं. यह भी पढ़ें: AI Jobs India: 'एआई नौकरियां छीनेगा नहीं, पैदा करेगा'! पीयूष गोयल ने भारत को बताया दुनिया का 'चेंज एजेंट'

इलाहाबाद हाईकोर्ट सबसे ऊपर

उच्च न्यायालयों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इलाहाबाद हाईकोर्ट में सर्वाधिक 12,07,240 मामले लंबित हैं. इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट (6,87,595 केस) और बॉम्बे हाईकोर्ट (6,64,979 केस) का स्थान आता है. जिला और अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां पेंडेंसी 5.84 प्रतिशत बढ़कर 4,76,57,328 हो गई है.

राज्यों की स्थिति: उत्तर प्रदेश शीर्ष पर

जिला अदालतों के मामले में राज्यों के स्तर पर भी भारी असमानता देखी गई है:

  • उत्तर प्रदेश: 1,13,45,328 लंबित मामले (देश में सर्वाधिक)
  • महाराष्ट्र: 59,26,999 लंबित मामले
  • पश्चिम बंगाल: 38,35,113 लंबित मामले

सरकार की पहल और भविष्य की राह

मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि मामलों का निपटारा पूरी तरह से न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और अदालतों के कंप्यूटरीकरण के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है। सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में शामिल हैं:

सरकार ने दोहराया कि वह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय सुनिश्चित करने और लंबित मामलों को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है.