नागपुर: बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर बेंच (Nagpur Bench) ने एक मानवीय और संवैधानिक मिसाल पेश करते हुए एक मुस्लिम युवक के शव (Dead Body of Muslim Youth) को हिंदू श्मशान घाट (Hindu Cremation Ground) से बाहर निकालने का आदेश दिया है. युवक का शव गलती से 'वारिस न होने' के संदेह में वहां दफना दिया गया था. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 (गरिमा का अधिकार) केवल जीवित व्यक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी लागू होता है. यह भी पढ़ें: Mumbai Shocking News: मुंबई के विले पार्ले में पारिवारिक विवाद का खौफनाक अंत, बहन को बचाने आए 24 वर्षीय भाई की जीजा ने की हत्या
पहचान की चूक और पूरा मामला
यह मामला मालेगांव के निवासी साजिद खान मुनव्वर खान का है. साजिद 25 जनवरी, 2026 को नागपुर में ताजउद्दीन बाबा के उर्स में शामिल होने आए थे और अगले ही दिन लापता हो गए. 28 जनवरी को बुटीबोरी के पास एक रेल दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई. चूंकि उस समय उनकी पहचान नहीं हो सकी थी, इसलिए स्थानीय प्रशासन ने उनके शव को 'अज्ञात' मानकर मोक्षधाम घाट (एक हिंदू श्मशान घाट) में दफना दिया था.
बाद में जब साजिद के भाई जावेद खान ने पुलिस रिकॉर्ड और तस्वीरों के जरिए साजिद की पहचान की, तो उन्होंने प्रशासन से शव को बाहर निकालने (exhumation) की अनुमति मांगी.
कानूनी लड़ाई और कोर्ट की टिप्पणी
शुरुआत में नागपुर ग्रामीण के तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारी ने शव को बाहर निकालने के अनुरोध को खारिज कर दिया था. इसके बाद परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. न्यायाधीश अनिल एस. किलोर और न्यायाधीश राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अंतिम संस्कार के लिए शव न सौंपना संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन है.
अदालत ने कहा, 'मृत शरीर की गरिमा बनाए रखना और उचित अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है.' पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि शव की पहचान स्पष्ट है और कोई अन्य दावेदार नहीं है, तो धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए उसे बाहर निकालने में कोई कानूनी बाधा नहीं होनी चाहिए. यह भी पढ़ें: ब्रेकअप का मतलब आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को मिली जमानत
अंतिम संस्कार के लिए निर्देश
हाईकोर्ट ने नागपुर नगर निगम और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए पूरी सावधानी के साथ शव को मोक्षधाम घाट से बाहर निकाला जाए.
अदालत ने स्पष्ट किया कि शव को बाहर निकालने के बाद इसे जावेद खान को सौंप दिया जाएगा, ताकि वे इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार बड़ा ताजबाग कब्रिस्तान में उनका अंतिम संस्कार कर सकें. यह निर्णय प्रशासनिक निकायों के लिए एक कड़ा संदेश है कि संवैधानिक नैतिकता केवल जीवित लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मृत्यु के बाद भी उतनी ही प्रभावी है.













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