Narayan Rane Retirement Rumors: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों पर विराम लगा दिया है. सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए राणे ने स्पष्ट किया कि हाल ही में सिंधुदुर्ग में एक जनसभा के दौरान दी गई उनकी टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने सक्रिय राजनीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह फिलहाल राजनीति छोड़ने का कोई इरादा नहीं रखते.
संन्यास की चर्चाओं पर क्या बोले राणे?
पूर्व मुख्यमंत्री ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि वह सार्वजनिक जीवन से दूरी बना रहे हैं. राणे ने सफाई देते हुए कहा, "किसने कहा कि मैंने संन्यास के संकेत दिए? मैंने ऐसा कभी नहीं कहा. मेरे बयान को गौर से सुनें. मैंने केवल यह कहा था कि यदि मेरे पद जनता के काम नहीं आते या मुझे उनके लिए काम नहीं करने दिया जाता, तब मैं 'पूर्ण विराम' लगाने के बारे में सोचूंगा. यह भी पढ़े: Narayan Rane Case: संजय राउत की मानहानि मामले में नारायण राणे कोर्ट में पेश, खुद को बताया निर्दोष, कहा- साहब मुकदमे का सामना करूंगा
सिंधुदुर्ग रैली का संदर्भ
बता दें कि शनिवार को सिंधुदुर्ग में एक रैली के दौरान राणे ने भावुक होते हुए कहा था कि "एक स्तर पर इंसान को रुकना पड़ता है, शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं." उन्होंने यह भी कहा था कि उनके दोनों बेटे-नीलेश (शिवसेना विधायक) और नीतेश (राज्य मंत्री)—राजनीति में सक्रिय हैं, इसलिए वह अब अपने व्यवसाय पर ध्यान देना चाहेंगे. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में उनके इस्तीफे और संन्यास को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं.
भाजपा मेरी आखिरी पार्टी
73 वर्षीय नेता ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही तय कर लिया है कि भाजपा उनके जीवन की आखिरी पार्टी होगी। उन्होंने कहा, "पार्टी बदलने का सवाल ही नहीं उठता। मैं आत्मसम्मान के साथ जीता हूं और मुझे किसी पद का लालच नहीं है।" राणे ने यह भी खुलासा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें राजनीति में सक्रिय रहने का निर्देश दिया था.
बेटों के काम की सराहना
राणे ने अपने दोनों बेटों के कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके बाद उनके बेटे जनता के साथ सहयोग जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को अच्छे से काम करने और नाम कमाने की सलाह दी है। राणे ने यह भी संकेत दिया कि उनके राजनीतिक जीवन में कई बाधाएं और साजिशें रची गईं, जिनका जिक्र वह अपनी आत्मकथा में कर सकते हैं.













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