Narayan Rane Case: महाराष्ट्र के रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लोकसभा सांसद नारायण राणे ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत (Sanjay Raut) द्वारा दायर मानहानि मामले में सोमवार, 25 अगस्त 2025 को मझगांव की मजिस्ट्रेट अदालत में अपने वकील के साथ पेश हुए. कोर्ट में सुनवाई के दौरान राने ने खुद को निर्दोष बताया. सुनवाई के दौरान राणे ने कहा कि वह इस मामले में मुकदमे का सामना करेंगे. अब इस मामले की कार्यवाही 11 नवंबर 2025 से गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ शुरू होगी.
मामला 2023 का है
यह विवाद जनवरी 2023 का हैं. मुंबई के उपनगर भांडुप में आयोजित कोंकण महोत्सव के दौरान नारायण राणे द्वारा की गई टिप्पणियों से शुरू हुआ। संजय राउत ने राणे के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राणे ने उनके बारे में "अपमानजनक, दुर्भावनापूर्ण और झूठे" बयान दिए। राउत ने दावा किया कि ये बयान उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए थे.
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राउत ने मझगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर किया है केस
राणे ने कथित तौर पर कहा था कि संजय राउत का नाम मतदाता सूची में नहीं था और जब वह (राणे) अविभाजित शिवसेना में थे, तब उन्होंने राउत को 2004 में राज्यसभा में निर्वाचित होने में मदद की थी. राउत ने इन बयानों को "झूठा और अपमानजनक" करार देते हुए राणे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत कार्रवाई की माँग की. राउत ने अपने वकील सरथक शेट्टी के माध्यम से मझगांव मजिस्ट्रेट अदालत में यह मामला दायर किया.
कोर्ट में राणे की दलील
इससे पहले, अप्रैल 2025 में मझगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए नारायण राणे को समन जारी किया था. राणे ने इस समन को विशेष एमपी/एमएलए अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ कोई मानहानि का मामला नहीं बनता. राणे ने दावा किया कि उनके बयान राजनीतिक संदर्भ में थे और इनका उद्देश्य व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि राउत और उनके बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है, और यह शिकायत राजनीतिक बदले की भावना से दायर की गई है.
राणे की याचिका ख़ारिज
हालांकि, विशेष अदालत ने 17 जुलाई 2025 को राणे की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राणे के बयान "अप्रमाणित और अस्पष्ट" थे, जो राउत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की मंशा दर्शाते हैं. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि राउत ने 2002 की मतदाता सूची का एक अंश प्रस्तुत किया, जिससे साबित होता है कि वह एक पंजीकृत मतदाता थे। इस आधार पर अदालत ने माना कि राणे के बयान प्रथम दृष्टया झूठे और अपमानजनक थे.
राउत ने 2023 में राणे से माफ़ी मांगने के लिए भेजा था नोटिस
संजय राउत ने 3 फरवरी 2023 को राणे को कानूनी नोटिस भेजकर अपने दावों को साबित करने या माफी माँगने की माँग की थी. राणे द्वारा जवाब न देने पर राउत ने अप्रैल 2023 में मझगांव अदालत में मानहानि का मामला दायर किया.













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