Dangerous Buildings in Navi Mumbai: नवी मुंबई में 501 इमारतें डेंजरस घोषित, 51 को तुरंत खाली करने के मनपा के आदेश
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Dangerous Buildings in Navi Mumbai:  महाराष्ट्र में जारी भारी बारिश के बीच नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) ने अपनी वार्षिक निरीक्षण  में 501 इमारतों को खतरनाक घोषित किया है. इनमें से 51 इमारतों को 'C-1' श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें अत्यंत खतरनाक माना गया है और तत्काल खाली करने के आदेश जारी किए गए हैं.

इमारतों को तुरन्त खाली करने के आदेश

यह सर्वेक्षण विभागवार तरीके से किया गया और महाराष्ट्र नगर पालिका अधिनियम की धारा 264 के अंतर्गत इन इमारतों को असुरक्षित घोषित किया गया है.  जिन इमारतों को तुरन्त खाली करने को लेकर मनपा की टफ नोटिस जारी किया गया है. यह भी पढ़े: Dangerous Buildings in Mumbai: मानसून से पहले BMC ने मुंबई में 134 इमारतों को जर्जर घोषित किया, 57 खाली कराया

इस साल  खतरनाक इमारतों की संख्या में कमी

मना के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार खतरनाक इमारतों की संख्या 527 से घटकर 501 हो गई है। यह कमी पुनर्विकास (redevelopment) परियोजनाओं की वजह से हुई है.

पिछली साल की श्रेणीवार स्थिति

C-1 श्रेणी (अत्यंत खतरनाक): 62 इमारतें

C-2A: 113

C-2B: 303

C-3: 49

मनपा ने जारी किए नोटिस, खाली करने की दी चेतावनी

मनपा आयुक्त कैलास शिंदे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि संबंधित इमारतों के मालिकों और निवासियों को लिखित नोटिस जारी कर इन खतरनाक इमारतों को तुरंत खाली करने को कहा गया है.  उन्होंने कहा, "यह नोटिस महाराष्ट्र सरकार के 2015 के खतरनाक इमारतों के विध्वंस (Demolition) संबंधी परिपत्र के अनुसार जारी किए गए हैं.

बिजली और पानी की आपूर्ति काटे जाने का चेतावनी

आयुक्त ने चेतावनी दी है कि C-1 श्रेणी की इमारतों की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी जाएगी/"यदि कोई निवासी या मालिक चेतावनी के बावजूद इन इमारतों में रहना जारी रखता है, तो किसी भी जान या माल की हानि की जिम्मेदारी पूरी तरह उसी की होगी। मनपा इस मामले में जिम्मेदार नहीं होगी.

साउथ मुंबई में म्हाडा की 96 इमारतें 'खतरनाक

वहीं साउथ मुंबई में म्हाडा की 96 इमारतों को अत्यंत खतरनाक' घोषित किया गया है. इन इमारतों के निवासियों को मानसून शुरू होने से पहले खाली करने के निर्देश दिए गए थे. ताकि किसी हादसे से लोगों को बचाया जा सके. मुंबई में जर्जर इमारतों का पुनर्विकास एक पुरानी और जटिल समस्या रही है. हर वर्ष मानसून के दौरान इमारत गिरने की कई घटनाएं सामने आती हैं.