बिजनेस

RBI Cancels Registration of 35 NBFCs: आरबीआई की बड़ी कार्रवाई, 35 NBFCs के लाइसेंस रद्द, 16 अन्य ने किया सरेंडर; देखें पूरी लिस्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 35 NBFCs के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही 16 अन्य संस्थानों ने अपने लाइसेंस सरेंडर किए हैं। अब ये संस्थाएं किसी भी प्रकार का वित्तीय लेनदेन नहीं कर सकेंगी.

RBI Cancels Registration of 35 NBFCs: आरबीआई की बड़ी कार्रवाई, 35 NBFCs के लाइसेंस रद्द, 16 अन्य ने किया सरेंडर; देखें पूरी लिस्ट
(Photo Credits Twitter)

RBI Cancels Registration of 35 NBFCs:  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (NBFC) में नियामक मानदंडों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है. केंद्रीय बैंक ने कुल 35 NBFCs के पंजीकरण प्रमाण पत्र (CoR) रद्द कर दिए हैं. आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत की गई यह कार्रवाई 9 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रभावी हुई है। इसके अतिरिक्त, 16 अन्य कंपनियों ने स्वेच्छा से अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं.

दिल्ली-NCR की कंपनियों पर गिरी सबसे ज्यादा गाज

इस नियामक कार्रवाई का सबसे बड़ा असर दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में देखने को मिला है. रद्द किए गए 35 लाइसेंसों में से अधिकांश कंपनियां दिल्ली-एनसीआर आधारित हैं. यह भी पढ़े: RBI Internship: छात्रों के लिए खुशखबरी! रिजर्व बैंक में इंटर्नशिप का मौका, आवेदन करने की क्या है आखरी तारीख, जानें डिटेल्स

प्रमुख कंपनियां जिनके लाइसेंस रद्द हुए:

  • दिल्ली/एनसीआर: एजी सिक्योरिटीज, एएलबी लीजिंग एंड फाइनेंस, एटीएम क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स, और कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया.

  • मुंबई: शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड.

  • जबलपुर (मप्र): सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड.

रद्द किए गए 35 NBFCs की पूरी सूची

आरबीआई द्वारा प्रतिबंधित की गई कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम नीचे दिए गए हैं:

  1. सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (जबलपुर)

  2. शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (मुंबई)

  3. ए जी सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड (दिल्ली/एनसीआर)

  4. एएलबी लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (दिल्ली/एनसीआर)

  5. एटीएम क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (दिल्ली/एनसीआर)

  6. ... (सूची में शामिल अन्य 30 कंपनियां भी अब वित्तीय लेनदेन के लिए प्रतिबंधित हैं)।

ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?

लाइसेंस रद्द होने के बाद इन 35 संस्थाओं पर तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित प्रतिबंध लागू हो गए हैं:

  • वे कोई भी नया ऋण (Loans) या अग्रिम राशि जारी नहीं कर सकते.

  • वे किसी भी प्रकार का स्टॉक, इक्विटी या ऋण प्राप्त नहीं कर सकते.

  • वे खुद को पंजीकृत NBFC के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकते.

16 कंपनियों ने स्वेच्छा से सरेंडर किए लाइसेंस

Forced cancellation के अलावा, 16 कंपनियों ने खुद अपने लाइसेंस लौटाए हैं। आरबीआई ने इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा है:

  1. बिजनेस एग्जिट (8 फर्में): जैसे धर्मेश स्टॉक ब्रोकिंग (मुंबई), जिन्होंने वित्तीय कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया.

  2. सीआईसी मानदंड (3 फर्में): जो अब कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के दायरे में आती हैं जिन्हें पंजीकरण की जरूरत नहीं.

  3. कॉर्पोरेट पुनर्गठन (5 फर्में): जैसे एडलवाइस रिटेल फाइनेंस लिमिटेड, जिनका विलय या विघटन हो गया है.

निवेशकों के लिए आरबीआई की सलाह

आरबीआई ने जनता को आगाह किया है कि वे किसी भी वित्तीय संस्थान के साथ लेनदेन करने से पहले उसकी नियामक स्थिति (Regulatory Status) की जांच जरूर करें। ध्यान दें कि NBFC के जमाकर्ताओं को DICGC (जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम) का सुरक्षा कवच नहीं मिलता है, जो कि कमर्शियल बैंकों के ग्राहकों को मिलता है.

वित्तीय तंत्र को मजबूत करने की कोशिश

आरबीआई का यह कदम देश के वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान नियमों के अनुसार, नई पंजीकरण वाली NBFCs के लिए न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) ₹10 करोड़ होना अनिवार्य है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 09, 2026 07:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).