शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल: सेंसेक्स 1,814 अंक चढ़कर 73,762 पर पहुंचा, ईरान युद्ध में शांति की उम्मीदों से निफ्टी में 567 अंकों की तेजी
1 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी तेजी देखी गई. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में 2.5% से अधिक का उछाल आया.
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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत शानदार तेजी के साथ की है. बुधवार, 1 अप्रैल को घरेलू बाजारों में 'गैप-अप' ओपनिंग हुई, जिसके पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका) संघर्ष के 33वें दिन तनाव कम होने की बढ़ती उम्मीदें हैं. 50 शेयरों वाला निफ्टी (Nifty) 567 अंक या 2.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,899 पर खुला, जबकि सेंसेक्स (Sensex) 1,814 अंकों की छलांग लगाकर 73,762.43 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में चौतरफा खरीदारी देखी जा रही है, जिसमें बैंकिंग, ऑटो और आईटी शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया. यह भी पढ़ें: Stock Market Holiday: रामनवमी पर आज शेयर बाजार में छुट्टी; NSE और BSE में नहीं होगा कामकाज, जानें MCX खुलेगा या नहीं?
ट्रंप के बयान से बाजार में लौटी रौनक
बाजार में आई इस तेजी का बड़ा श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को दिया जा रहा है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिकी सेना अगले तीन हफ्तों के भीतर ईरान पर हमले रोक सकती है. ट्रंप ने यह भी कहा कि संघर्ष विराम के लिए तेहरान को किसी पूर्व शर्त के रूप में समझौता करने की आवश्यकता नहीं हो सकती है. हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उनके नेताओं को निशाना बनाया जाना जारी रहा, तो अमेरिकी कंपनियों को जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
सेक्टर-वार प्रदर्शन और निवेशकों का रुख
बुधवार के कारोबारी सत्र में सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2 से 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. ऑटो सेक्टर के शेयर आज विशेष रूप से फोकस में हैं, क्योंकि कंपनियां अपने मासिक बिक्री के आंकड़े जारी करने वाली हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि मार्च के दौरान भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी, इसलिए वर्तमान रिकवरी निवेशकों के लिए राहत भरी है. विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बाजार में अभी भी अस्थिरता बनी रह सकती है, इसलिए निवेशकों को केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही निवेश करना चाहिए.
संस्थागत निवेशकों की हलचल
संस्थागत मोर्चे पर मिली-जुली स्थिति बनी हुई है. सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 11,163 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची, जिससे मार्च में उनकी बिकवाली का सिलसिला जारी रहा. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देते हुए 14,894 करोड़ रुपये की खरीदारी की. तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी जब तक 24,000 के स्तर को पार कर वहां टिक नहीं जाता, तब तक पूरी तरह से तेजी का ट्रेंड कहना जल्दबाजी होगी.
वैश्विक बाजार और कमोडिटी का हाल
अमेरिकी बाजार (Wall Street) में मिला-जुला रुख रहा, जहां S&P 500 में गिरावट दिखी लेकिन नैस्डैक (Nasdaq) 4 प्रतिशत चढ़ा. एशियाई बाजारों में जबरदस्त तेजी रही; जापान का निक्केई 4 प्रतिशत, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 2 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6 प्रतिशत से अधिक उछला.
वहीं कमोडिटी सेगमेंट में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त देखी गई. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.81 प्रतिशत बढ़कर 105.86 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 1.90 प्रतिशत बढ़कर 103.31 डॉलर पर कारोबार कर रहा है. तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई और बाजार के लिए चुनौती बन सकती हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 01, 2026 11:10 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

