दिल्ली-एनसीआर: गर्मियों में घरों में भी कैसे लग जाती है आग?
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

गर्मियां शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं. हाल ही में दिल्ली के विवेक विहार में एक रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग में 7 लोगों की जान चली गई. पालम में भी आग की घटना में 9 लोगों की जान गई.दिल्ली अग्निशमन सेवा विभाग का अपना डाटा बताता है कि इस साल पहले चार महीनों में ही कुल 7,801 आग लगने की शिकायतें आईं. पिछले साल इसी अवधि में आई 6,511 कॉल्स से इस साल का आंकड़ा कहीं ज्यादा है. सिर्फ अप्रैल महीने में 2,375 मामले सामने आए हैं जबकि मार्च में 1,538 घटनाएं दर्ज की गईं. अधिकारियों का कहना है कि इसकी बड़ी वजह तेज गर्मी, बिजली का अत्यधिक इस्तेमाल और इमारतों पर बढ़ता दबाव है. गर्मियों में एसी, कूलर और पंखों के लगातार चलने से बिजली की खपत तेज हो जाती है.

दिल्ली फायर सर्विस में डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर ए. के. मलिक के मुताबिक उत्तर भारत में तेज गर्मी के कारण इस समय सूखा हो जाता है, हवा में नमी की कमी होती है, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. अक्सर दिल्ली में होने वाली बड़ी आग की घटनाओं और बचाव कार्यों के संबंध में मुख्य आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में कार्य करने वाले मलिक बताते हैं, "हर साल अप्रैल से जुलाई के बीच आग से जुड़ी कॉल्स की संख्या में उछाल देखने को मिलता है. आम तौर पर हमें रोज करीब 80 से 90 कॉल्स मिलती हैं. लेकिन इन महीनों में यह संख्या बढ़कर लगभग 180 तक पहुंच जाती है."

केवल अप्रैल में रोजाना आग लगने की करीब 120 कॉल्स दर्ज की गईं. बेहद गर्म दिनों में कॉल्स की संख्या 200 तक भी पहुंच जाती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्थिति और गंभीर बनने से पहले थर्मल ऑडिट, वायरिंग बदलने और अन्य सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी है.

दिल्ली-एनसीआर में क्यों तेजी से फैलती है आग?

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में आग लगने से जुड़े जनवरी में 79, फरवरी में 97, मार्च में 128 और अप्रैल (29 अप्रैल तक) में 286 मामले दर्ज किए गए. रिहायशी इमारतों में आग लगने के दो मुख्य कारण होते हैं. खाना बनाते समय लापरवाही से गैस लीक होने पर आग लग जाती है. मगर 70 प्रतिशत घटनाएं बिजली के उपकरणों से जुड़ी होती हैं.

इसमें तापमान बड़ी भूमिका निभाता है. जितनी ज्यादा गर्मी होगी, उतनी ही ज्यादा चिंगारी के बड़ी आग में बदलने की संभावना बढ़ जाती है. इसी वजह से गर्मियों में कूड़े में आग लगने के मामले भी ज्यादा आते हैं.

डीडब्ल्यू ने दिल्ली अग्निशमन सेवा विभाग के दो पूर्व निदेशकों आर. सी. शर्मा और अतुल गर्ग से बात की. अतुल गर्ग ने बताया कि दिल्ली में रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक इमारतें बहुत ज्यादा कंजस्टेड हैं. यहां की जनसंख्या घनत्व (पॉप्युलेशन डेंसिटी) अन्य राज्यों जैसे राजस्थान और पंजाब की तुलना में काफी अधिक है. इसीलिए यहां आग लगने के मामले और उसके फैलने से होने वाले नुकसान की संख्या ज्यादा है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इमारत का डिजाइन भी आग के तेजी से फैलने का कारण बनता है. इमारतों में बिजली की वायरिंग काफी पुरानी होती है. समय के साथ यह कमजोर और खराब हो जाती है. आर.सी शर्मा का कहना है कि शॉर्ट सर्किट से बचाने वाले उपकरण अक्सर ठीक से काम नहीं करते. मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) को अचानक ज्यादा करंट और ओवरलोड की स्थिति में ट्रिप करना चाहिए. लेकिन कई बार यह काम नहीं करता. वह बताते हैं, "दिल्ली के नियमों के अनुसार, लो-राइज मकानों और करीब 34 मीटर तक की इमारतों में फायर सेफ्टी इंतजाम होना जरूरी है. लेकिन यह काम आते हैं जब आग लग चुकी होती है. घरों में फायर अलार्म जैसे सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत है. यही कारण है कि आग लगने पर लोगों को समय पर पता नहीं चलता और वे सोते रह जाते हैं."

कंपनी देखकर ही खरीदें उपकरण

एसी किस कंपनी से खरीदा गया है, यह बेहद महत्वपूर्ण है. कम कीमत के कारण लोग सस्ते विकल्प खरीद लेते हैं जबकि अच्छी और भरोसेमंद कंपनियों के एसी ज्यादा सुरक्षित होते हैं. गर्मियों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाता है. मौसम सूखा है. ऐसे में तारों से चिंगारी निकलने और आग लगने की संभावना बढ़ती है.

आर. सी. शर्मा के अपने अनुभव से आग लगने की शुरुआत किसी इलेक्ट्रिक उपकरण से ही होती है. एसी के अलावा यह सीढ़ियों या एंट्रेंस पर लगे इलेक्ट्रिक मीटर से भी हो सकती है. जिससे बिल्डिंग के अन्य फ्लोर पर आग फैलने लगती है. आमतौर पर ढीली वायरिंग, ओवरलोड, हीटिंग या खराब कनेक्शन से ऐसी घटनाएं होती हैं.

ढीले जोड़ और ढीले संपर्क (कॉन्टैक्ट) बिजली के कनेक्शन को कमजोर बना देते हैं. इससे स्पार्किंग और ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है. लोग एक ही वायरिंग पर कूलर और एसी जैसे भारी उपकरण चलाते हैं. तार पर जरूरत से ज्यादा लोड पड़ता है. वायरिंग उस लोड को सह नहीं पाती और शॉर्ट सर्किट हो जाती है या आग लग जाती है.

आर. सी. शर्मा ने बताया, "विंडो एसी में कंप्रेसर और फैन दोनों एक ही यूनिट में होते हैं. यह उपकरण के भीतर गर्मी पैदा करता है. अगर वायरिंग, प्लग या एमसीबी सही क्षमता के नहीं हैं, तो यह ओवरहीटिंग और स्पार्किंग का कारण बन सकता है. समय रहते एसी की सफाई या सर्विसिंग करना बहुत जरुरी है. वरना धूल जमा होने से हीट बाहर नहीं निकल पाती."

घर पर आग लगने से कैसे बचाएं?

मार्च का महीना शुरू होते ही एसी और अन्य बिजली के उपकरणों की नियमित सर्विसिंग कराना जरूरी है. ओवरहीटिंग और ओवरलोड जैसी समस्याओं को समय रहते पहचानने के लिए इलेक्ट्रिशियन से जांच भी कराएं ताकि आग लगने का खतरा कम हो सके. अतुल गर्ग बताते हैं कि एसी और कूलर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना चाहिए. हर 2 घंटे एसी चलाने के बाद 15 मिनट के लिए उसे आराम दें.

खाना बनाते समय ध्यान रखें, खासकर जब तेल गर्म हो रहा हो. अतुल गर्ग ने घरों के लिए कुछ अहम सुरक्षा सुझाव दिए, "खराब या घिसे हुए प्लग और तारों को तुरंत बदल दें. तारों को कालीन या दरवाजों के नीचे से न ले जाएं. इससे चुपचाप चिंगारी लगने का खतरा बढ़ जाता है."

आर. सी. शर्मा घरों में स्मोक अलार्म और फायर स्प्रिंकलर इंस्टॉल करने की हिदायत देते हैं. यह एक उपकरण है जो गर्मी महसूस करते ही अपने आप चालू हो जाता है. गर्मी से इसके अंदर की कांच की छोटी ट्यूब टूट जाती है और पानी फुहार की तरह बाहर आता है. वह आगे कहते हैं, "रात में सभी स्विच बंद करके सोना चाहिए. बाथरूम में हमेशा दो बाल्टी पानी भरकर रखें. इसे इमरजेंसी में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. एमसीबी के बार-बार ट्रिप होने, पानी के रिसाव और वायरिंग में किसी भी खराबी की नियमित जांच करवाते रहना चाहिए."

उनके अनुसार गर्मियों में खतरे के संकेतों पर नजर बनाए रखें. एसी से अजीब आवाजें आएं, अपने आप ऑन-ऑफ हों या जलने का धुआं दिखे तो तुरंत ध्यान दें. इलाके में बिजली बार-बार घटती-बढ़ती रहने की स्थिति में स्टेबलाइजर का इस्तेमाल आवश्यक करें.