पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही लोकतंत्र और सामाजिक ताने-बाने की तस्वीर भी बदलती दिखने लगी है. हाल में जीते एक बीजेपी विधायक रितेश तिवारी ने कहा है कि वो पांच साल मुसलमानों का कोई काम नहीं करेंगे.पश्चिम बंगाल अपने सामाजिक सद्भाव के लिए मशहूर रहा है. यहां सरकार भले बदलती रही, हिंदू और मुसलमानों के बीच आपसी भाईचारा जस का तस रहा. यहां कभी इन दोनों धर्मों के लोगों के बीच सामाजिक खाई या दंगे भी नहीं हुए हैं. करीब बारह साल पहले राज्य में बीजेपी के मजबूती से उभरने के बाद से ही धर्म के आधार पर सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की कवायद शुरू हुई थी. अब हाल के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ जीत कर बीजेपी के सत्ता में आने के बाद धार्मिक खाई और चौड़ी होती दिखने लगी है.
सत्ता संभालने के एक सप्ताह के भीतर सरकार ने तमाम अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने का फैसला किया है. अब तक कोलकाता में मांस बेचने वाली एक दुकान और एक चमड़ा फैक्ट्री अवैध होने के आरोप में बुलडोजर से ढहाई जा चुकी है. दार्जिलिंग के बीजेपी सांसद राजू विस्टा ने तो उत्तर प्रदेश से 20 बुलडोजर खरीदने का भी आर्डर दे दिया है. अब ताजा मामले में कोलकाता की काशीपुर-बेलगछिया सीट से जीतने वाले बीजेपी नेता रितेश तिवारी का एक बयान विवाद और सुर्खियां बटोर रहा है.
तिवारी ने अपनी एक जनसभा में कहा है, "मुसलमानों ने मुझे कोई वोट नहीं दिया है. इसलिए मै पांच साल तक उनका कोई काम नहीं करूंगा."
डीडब्ल्यू से बातचीत में बीजेपी विधायक रितेश तिवारी ने कहा, "हां, मैंने ऐसा कहा है. मुझे जिन लोगों ने वोट नहीं दिया है उनका कोई भी काम नहीं करूंगा. 'सबका साथ और सबका विकास' के साथ अब 'सबका हिसाब' भी होगा." वो कहते हैं, "मुसलमानों ने मुझे वोट नहीं दिया है. ऐसे में अगर मैं उनका काम करता हूं तो यह उनके साथ अन्याय होगा, जिन्होंने मुझे वोट देकर जिताया है. इसलिए मेरी पहली प्राथमिकता वो लोग होंगे जिन्होंने चुनाव में मेरा समर्थन किया है."
कौन हैं बीजेपी विधायक रितेश तिवारी?
रितेश तिवारी ने कोलकाता की काशीपुर-बेलगाछिया सीट पर कड़े मुकाबले में तृणमूल कांग्रेस के अतिन घोष को 1651 वोटों से हराया है. बीजेपी ने पहली बार यह सीट जीती है. उनके चुनाव प्रचार में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिवारी के चुनाव प्रचार में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सांसद मनोज तिवारी समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे.
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वर्ष 1989 में बीजेपी में शामिल होने वाले तिवारी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री ली है. वह पश्चिम बंगाल में बीजेपी के उपाध्यक्ष भी रहे हैं. रितेश वर्ष 2014 और 2016 में कोलकाता की चौरंगी सीट चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन उनको तृणमूल कांग्रेस की नयना बनर्जी से हार का सामना करना पड़ा था. वर्ष 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उनको निलंबित कर दिया गया था. लेकिन बीते साल शमीक भट्टाचार्य के अध्यक्ष बनने के बाद उनकी बीजेपी में वापसी हो गई थी.
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पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही कुछ ऐसे फैसले किए है जिनको ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़ कर देखा जा रहा है. इसमें तमाम सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के समय वंदे मातरम का गायन अनिवार्य करना शामिल है. सरकार ने सड़कों पर नमाज पढ़ने और धार्मिक स्थलों पर ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजाने पर पाबंदी लगा दी है.
इसके अलावा कलकत्ता हाई कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए बिना लिखित अनुमति और 'फिट फॉर स्लॉटर' (हत्या के लिए उपयुक्त) प्रमाण-पत्र के बिना गाय, बैल या बछड़े की हत्या पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. तमाम केंद्रीय योजनाएं तत्काल प्रभाव से राज्य में लागू कर दी गई हैं. सरकार ने सीमा पार से घुसपैठ रोकने के लिए कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को करीब छह सौ एकड़ 45 दिनों के भीतर सौंपने का फैसला किया है.
इन फैसलों पर तो नागरिक, समाज और राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा ही रहे थे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब बीजेपी विधायक के ताजा बयान ने पार्टी का एजेंडा साफ कर दिया है. वे बताते हैं कि नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस बात के पर्याप्त संकेत दे दिए हैं कि वो यहां भी उत्तर प्रदेश का योगी मॉडल ही लागू करेंगे. वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक पुलकेश घोष डीडब्ल्यू से कहते हैं, "बीजेपी सरकार के फैसलों और बयानों पर किसी को हैरत नहीं होनी चाहिए. बाकी राज्यों की तरह पार्टी यहां भी हिंदू-मुस्लिम और बुलडोजर से न्याय वाला एजेंडा लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है."
राज्य में लगते रहे हैं वर्ग विशेष के 'तुष्टिकरण' के आरोप
वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक शिखा मुखर्जी डीडब्ल्यू से बातचीत में कहती हैं, "नई सरकार अपने पुराने एजेंडे पर ही आगे बढ़ रही है. पार्टी के नेता ममता बनर्जी सरकार पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के आरोप लगाती रही है. अब वो खुद हिंदुओं के तुष्टिकरण की नीति पर आगे बढ़ रही है." उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी समेत पार्टी के तमाम शीर्ष नेताओं ने अपने चुनाव अभियान के दौरान बदलाव की अपील की थी लेकिन सत्ता हासिल होने के बाद वह बदले की राह पर बढ़ती नजर आ रही है.
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कोलकाता के एक कालेज में समाजशास्त्र की प्रोफेसर रही डा. कुमुदिनी भट्टाचार्य डीडब्ल्यू से कहती हैं, "नई सरकार को समाज को सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश करनी चाहिए. उसे या उसमें शामिल लोगों को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे बंगाल का सदियों पुराना सामाजिक ताना-बाना और आपसी सद्भाव प्रभावित हो."
बीजेपी नेताओं ने फिलहाल तिवारी के इस बयान पर कोई टिप्पणी करने से इंकार किया है.
विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष डीडब्ल्यू से कहते हैं, "बीजेपी ने सत्ता में आते ही अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है. 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा देने वाली पार्टी अब अल्पसंख्यकों से 'बदला' लेने की नीति पर बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बुलडोजर न्याय वाला तरीका यहां कारगर नहीं साबित होगा."
सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहते हैं, "बीजेपी ने कभी संविधान की भावना को अहमियत नहीं दी है. पार्टी के विधायक का ताजा बयान भी इसका सबूत है. ऐसे बयान पहले दूसरे राज्यों में सुनने को मिलते थे. लेकिन अब बंगाल में भी यह शुरू हो गया है. आम लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे."











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