Vat Savitri Vrat 2026 Wishes In Hindi: सुहागिन महिलाओं के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाने वाला 'वट सावित्री व्रत' (Vat Savitri Vrat) इस वर्ष 16 मई 2026, शनिवार को श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री (Savitri) ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और बुद्धिमानी से यमराज (Yamraj) को पराजित कर अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे. आज के दौर में यह व्रत उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.
हिंदू धर्म में वट वृक्ष (बरगद) को अत्यंत पूजनीय माना गया है .शास्त्रों के अनुसार, वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है. महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा करती हैं. मान्यता है कि इस वृक्ष की उपासना करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और पति को दीर्घायु प्राप्त होती है.
डिजिटल युग में वट सावित्री पर्व की रौनक सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रही है. महिलाएं एक-दूसरे को वॉट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए भक्तिमय शायरी, कोट्स और एचडी इमेजेस भेजकर शुभकामनाएं दे रही हैं. ‘अखंड सौभाग्यवती भव:’ जैसे संदेशों के साथ वैवाहिक सुख की कामना की जा रही है.





वट सावित्री की पूजा को पूर्ण करने के लिए महिलाएं एक विशिष्ट विधि का पालन करती हैं:
- प्रातः काल की तैयारी: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार करें.
- प्रतिमा स्थापना: वट वृक्ष के नीचे माता सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें.
- अर्पण: वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और उसके बाद फूल, अक्षत, भीगा हुआ चना और गुड़ चढ़ाएं.
- परिक्रमा: कच्चे सूत को वृक्ष के चारों ओर सात बार लपेटते हुए परिक्रमा करें.
- कथा श्रवण: हाथ में भीगे हुए चने लेकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें. पूजा के अंत में फल और वस्त्रों का दान करना शुभ माना जाता है.













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