डिजिटल युग में "कोलकाता फटाफट" (Kolkata FF) और "गुजरात फटाफट" जैसे खेलों के परिणामों को ऑनलाइन खोजने वाले यूजर्स की संख्या लाखों में है. गूगल पर "Kolkata FF Results Today" या "Live Results" जैसे कीवर्ड्स की भारी सर्च वॉल्यूम ने साइबर अपराधियों के लिए एक नया मैदान तैयार कर दिया है. जानकारों का कहना है कि रिजल्ट दिखाने का दावा करने वाली कई वेबसाइटें वास्तव में 'मिरर साइट्स' होती हैं, जिनका उद्देश्य यूजर्स के डिवाइस में मालवेयर इंजेक्ट करना या उनकी व्यक्तिगत जानकारी चुराना होता है.
'श्योर शॉट' और वीआईपी नंबर के नाम पर ठगी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर यूट्यूब और व्हाट्सएप पर स्कैमर्स का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है. ये अपराधी खुद को "लीक रिजल्ट" का जानकार बताकर हताश खिलाड़ियों को "वीआईपी नंबर" बेचने का झांसा देते हैं. 'फटाफट' पैसा कमाने की चाहत में लोग इन जालसाजों को मोटी रकम दे बैठते हैं, जबकि असलियत में ऐसे किसी भी "लीक" का कोई अस्तित्व नहीं होता. यह पूरी तरह से एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी है.
डेटा हार्वेस्टिंग और साइबर सुरक्षा का संकट
इन अनधिकृत वेबसाइटों पर सुरक्षा के बुनियादी प्रोटोकॉल (जैसे SSL सर्टिफिकेट) की कमी होती है. जब कोई यूजर इन साइट्स पर जाता है, तो उसका आईपी एड्रेस, लोकेशन और ब्राउजिंग हिस्ट्री अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट्स द्वारा 'हार्वेस्ट' कर ली जाती है. इस डेटा का उपयोग बाद में फिशिंग हमलों या बैंकिंग फ्रॉड के लिए किया जा सकता है. चूंकि ये प्लेटफॉर्म अवैध हैं, इसलिए इनका कोई "आधिकारिक" पोर्टल नहीं होता, जिससे धोखाधड़ी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है.
वित्तीय जोखिम और कानूनी जटिलताएं
कोलकाता और गुजरात जैसे क्षेत्रों में लोकप्रिय होने के बावजूद, ये खेल कानून के दायरे से बाहर संचालित होते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर सट्टेबाजी के लिए उपयोग किए जाने वाले पेमेंट गेटवे अक्सर फर्जी होते हैं, जहां पैसा जमा होते ही गायब हो जाता है. भारत के सार्वजनिक जुआ अधिनियम (Public Gambling Act) के तहत ऐसे खेलों में शामिल होना न केवल वित्तीय जोखिम भरा है, बल्कि इसके गंभीर कानूनी परिणाम भी हो सकते हैं.
जागरूकता ही बचाव है
विशेषज्ञों का कहना है कि रातों-रात अमीर बनने का लालच अक्सर लोगों को इन खतरनाक वेबसाइटों तक ले जाता है. सुरक्षित रहने का एकमात्र तरीका इन अवैध गतिविधियों से दूर रहना है. अपनी बैंकिंग डिटेल्स या व्यक्तिगत जानकारी किसी भी असत्यापित पोर्टल पर साझा न करें. यदि आप किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें.













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