नई दिल्ली/लाहौर: साल 2026 में 'देखना ही विश्वास करना है' वाली कहावत पुरानी हो चुकी है. इंटरनेट पर इन दिनों 'अलीना आमिर 4:47 नया वीडियो' (Alina Amir 4:47 New Video) या 'आरोही मिम 3 मिनट 24 सेकंड वायरल लिंक' (Arohi Mim 3 Minutes 24 Second Viral Video Link) जैसे मैसेज तेजी से फैल रहे हैं, लेकिन सावधान! ये न तो कोई वास्तविक वीडियो हैं और न ही कोई लीक्ड फुटेज. ये साइबर अपराधियों द्वारा बिछाया गया एक मनोवैज्ञानिक जाल है, जिसमें AI डीपफेक और मालवेयर (AI Deepfakes And Malware) का इस्तेमाल कर आपकी डिजिटल सुरक्षा में सेंध लगाई जा रही है. यह भी पढ़ें: अलीना आमिर 'लीक' वीडियो कांड: 2026 में डीपफेक तकनीक का काला चेहरा आया सामने; जानें कैसे काम करता है यह खतरनाक स्कैम
'टाइमस्टैम्प ट्रैप': 4:47 और 3:24 का गणित
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्कैमर्स वीडियो के साथ '4 मिनट 47 सेकंड' या '7 मिनट 11 सेकंड' जैसे सटीक समय (Odd Timestamps) इसलिए लिखते हैं ताकि यूजर को लगे कि यह किसी मोबाइल से रिकॉर्ड की गई असली फुटेज है.
- खतरनाक लिंक्स की लिस्ट: 2026 में 4:47 (अलीना आमिर मालवेयर), 3:24 (आरोही मिम सट्टेबाजी ऐप ट्रैप) और 19:34 (पायल गेमिंग डीपफेक लूप) जैसे लिंक्स को 'ब्लैकलिस्ट' किया गया है.
- सर्च इंजन मैनिपुलेशन: इन सटीक नंबरों का इस्तेमाल गूगल सर्च में ऊपर आने के लिए भी किया जाता है. यदि समय बहुत अधिक सटीक और असामान्य है, तो यह 99% एक जाल है.
अलीना आमिर बता रही हैं कि उनके नए वायरल वीडियो को बनाने के लिए AI का इस्तेमाल कैसे किया गया?
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AI डीपफेक को कैसे पहचानें? (Visual Forensics)
भले ही 2026 की एआई तकनीक बहुत उन्नत हो गई है, लेकिन फिर भी कुछ डिजिटल निशान रह जाते हैं:
- पलकों का न झपकना (Dead Eye Syndrome): एआई इंसान की आंखों की प्राकृतिक गतिविधियों की नकल करने में संघर्ष करता है. यदि वीडियो में व्यक्ति बहुत देर तक पलकें नहीं झपकाता या पलकें झपकने का पैटर्न रोबोटिक है, तो वह डीपफेक हो सकता है.
- लिप-सिंक और दांत: जब व्यक्ति बोलता है, तो उसके होंठों की मूवमेंट और ऑडियो में अंतर (Lip-Sync Fail) देखें। अक्सर एआई वीडियो में दांत एक सफेद ब्लॉक की तरह दिखते हैं, उनमें अलग-अलग दांतों की बनावट नहीं दिखती.
- फ्लिकर इफेक्ट (Flicker Effect): यदि व्यक्ति अपने चेहरे के सामने हाथ लाता है या सिर तेजी से घुमाता है, तो चेहरे के किनारों पर हल्का सा डिजिटल 'झटका' या धुंधलापन दिखाई देगा.
- लाइटिंग की गड़बड़ी: क्या चेहरे पर पड़ने वाली रोशनी कमरे की बैकग्राउंड लाइट से मेल खाती है? डीपफेक में चेहरा अक्सर बैकग्राउंड की तुलना में अधिक चमकदार या वॉटरी (Glossy) दिखता है. यह भी पढ़ें: Alina Amir और Arohi Mim के 'वायरल वीडियो' का सच: 7:11 और 4:47 जैसे टाइमस्टैम्प के पीछे छिपा है बड़ा साइबर स्कैम
डाउनलोड ट्रैप से कैसे बचें?
सिर्फ वीडियो देखना ही नहीं, बल्कि लिंक पर क्लिक करना भी खतरनाक है:
- फाइल एक्सटेंशन चेक करें: यदि आप वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं और फाइल का नाम .apk (एंड्रॉयड ऐप) या .exe (विंडोज प्रोग्राम) है, तो उसे तुरंत कैंसिल करें. असली वीडियो हमेशा .mp4, .mov या .avi फॉर्मेट में होता है.
- रीडायरेक्ट टेस्ट: यदि प्ले बटन दबाते ही नया टैब खुलता है या आपसे कोई 'वीडियो प्लेयर' इंस्टॉल करने को कहा जाता है, तो समझ लीजिए कि यह मालवेयर है.
- URL की जांच: स्कैमर्स अब सरकारी (.gov) या यूनिवर्सिटी (.edu) की वेबसाइट्स को हैक कर वहां ये फर्जी पेज होस्ट कर रहे हैं। केवल डोमेन नेम पर भरोसा न करें, कंटेंट की प्रमाणिकता देखें.
निष्कर्ष: शेयर नहीं, सतर्कता बढ़ाएं
अलीना आमिर और आरोही मिम ने सार्वजनिक रूप से इन वीडियो को एआई-जनित बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है. 2026 का यह 'शैडो इकोनॉमी' आपकी जिज्ञासा का फायदा उठाकर आपको सट्टेबाजी ऐप्स और वायरस डाउनलोड कराने के लिए इस्तेमाल कर रहा है. याद रखें, 'लीक' के नाम पर मिलने वाले लिंक में अक्सर वीडियो नहीं, बल्कि आपके फोन का डेटा चुराने वाला वायरस होता है.












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