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विदेश की खबरें | समुद्र में रहने वाले कवकों से मिलिए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. प्लाइमाउथ (ब्रिटेन), चार जनवरी (द कन्वरसेशन) कवक सिर्फ मिट्टी और जमीन पर उगने वाले पौधों पर ही नहीं रहते बल्कि वे समुद्री वातावरण में भी पनपते हैं। दरअसल, समुद्र में रहने वाले कवक कुल समुद्री बायोमास (जैवभार) के पांच प्रतिशत हिस्से का निर्माण करते हैं।

विदेश की खबरें | समुद्र में रहने वाले कवकों से मिलिए
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

प्लाइमाउथ (ब्रिटेन), चार जनवरी (द कन्वरसेशन) कवक सिर्फ मिट्टी और जमीन पर उगने वाले पौधों पर ही नहीं रहते बल्कि वे समुद्री वातावरण में भी पनपते हैं। दरअसल, समुद्र में रहने वाले कवक कुल समुद्री बायोमास (जैवभार) के पांच प्रतिशत हिस्से का निर्माण करते हैं।

भूमि पर पाए जाने वाले अपने कवकों के विपरीत, अधिकांश समुद्री कवक केवल माइक्रोस्कोप से ही देखे जा सकते हैं। इनमें ‘समुद्री लाइकेन’ अपवाद हैं, जिन्हें समुद्री तटों की चट्टानों पर देखा जा सकता है।

कुछ शुरुआती समुद्री कवकविज्ञानियों की बदौलत विज्ञान को एक सदी से भी ज्यादा समय से समुद्री कवकों के बारे में पता है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने कभी इन कवक के बारे में नहीं सुना है। यहां तक कि मेरे जैसे वैज्ञानिकों को भी अभी भी उनकी विविधता और पारिस्थितिक महत्व के बारे में सीमित जानकारी है, क्योंकि बहुत कम शोधकर्ता इन कवकों के संबंध में काम कर रहे हैं।

समुद्री कवक विज्ञान (समुद्र में कवकों के अध्ययन का विज्ञान) के क्षेत्र को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन इसमें खोजने के लिए बहुत कुछ है।

समुद्र में रहने वाले कवकों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। समुद्री कवक की कुछ ज्ञात परिभाषित प्रजातियां हैं जो केवल समुद्री वातावरण में पाई जाती हैं। इनमें समुद्री लाइकेन के साथ-साथ कवक की कई अन्य प्रजातियां शामिल हैं जो तटीय समुद्री आवासों से एकत्रित लकड़ी और पौधों की सामग्री पर पाई जाती हैं।

दूसरा समूह अधिक अस्पष्ट है और वर्तमान में बहुत अधिक पहचाना नहीं गया है। ये कवक समुद्र में पाए जाते हैं, लेकिन भूमि पर पाए जाने वाले कवक के समान या उनसे संबंधित प्रतीत होते हैं।

समुद्री जैव विविधता अध्ययनों में ये सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले कवक हैं, लेकिन शोधकर्ताओं के लिए एक चुनौती पेश करते हैं क्योंकि इनमें से कुछ नदियों के जरिये समुद्र में बहकर आ गए होंगे। हालांकि, इनमें से कुछ कवक कम से कम समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में पनप रहे रहे हैं और विकसित हो रहे हैं।

मेरे जैसे वैज्ञानिक पूछ रहे हैं कि समुद्री कवक कैसे विकसित हुए और उन्होंने खारे पानी के जीवन के लिए कैसे खुद को ढाल लिया। समुद्र में रहना कई चुनौतियों से भरा होता है। भोजन की उपलब्धता अनियमित हो सकती है, जिससे जीवन का संकट पैदा हो सकता है।

समुद्री कवकों को जीवित रहने के लिए अनेक प्रकार के अनुकूल माहौल की आवश्यकता होती है, तथा खुले समुद्र से अलग-थलग पड़े कवक उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप अपनी कोशिका के आकार और आकृति में परिवर्तन कर सकते हैं।

जब संसाधन कम होते हैं, तो छोटी कोशिकाएं हावी हो जाती हैं क्योंकि वे पोषक तत्वों को अवशोषित करने में अधिक कुशल होती हैं। जब संसाधन अधिक होते हैं, तो बड़ी कोशिकाएं हावी हो जाती हैं और कभी-कभी बहुत नए रूपों में विकसित हो जाती हैं।

तो, अगली बार जब आप व्हेल, मैकेरल या पेंगुइन के साथ-साथ समुद्री जीवन की अद्भुत विविधता के बारे में सोचें, तो उन सभी आकर्षक समुद्री कवकों पर भी विचार करें जो हमारे नीले ग्रह की सतह के नीचे जीवित हैं।

(द कन्वरसेशन)

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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 04, 2025 05:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).