नयी दिल्ली, 22 जुलाई : दिल्ली पुलिस ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ के नाम पर एक व्यक्ति से 17 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. यहां एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. ये लोग पीड़ितों को विभिन्न वेबसाइट की समीक्षा करके रुपये कमाने का प्रस्ताव देकर झांसे में लेते थे. आरोपियों की पहचान अंकुर मिश्रा (22), कृतार्थ (21), विश्वाश शर्मा (32) और केतन मिश्रा (18) के रूप में हुई है. उनहेंने आकर्षक ऑनलाइन नौकरी के अवसरों की पेशकश करके सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को लुभाया और बाद में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े वित्तीय जाल में फंसाकर उन्हें ठगा. पीड़ित ने 27 मई को शिकायत दर्ज कराई. उसने कहा कि उसे विभिन्न वेबसाइट की समीक्षा करके रुपये कमाने का प्रस्ताव दिया गया था.
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने कहा, ‘‘शुरुआत में शिकायतकर्ता को प्रति समीक्षा 50 रुपये मिलते थे लेकिन बाद में उसे ज्यादा धन वापसी का वादे करते हुए ‘प्रीपेड क्रिप्टोकरेंसी’ लेनदेन में भाग लेने के लिए राजी कर लिया गया.’’ गोयल ने बताया कि धोखेबाज विभिन्न बहानों से और अधिक रुपये जमा करने की उससे मांग करते रहे और उन्होंने उससे 17.49 लाख रुपये ठग लिए. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. जांच के दौरान पता लगा कि शिकायतकर्ता के खाते से पांच लाख रुपये अंकुर मिश्रा के नाम से पंजीकृत एक निजी बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे. सीसीटीवी फुटेज से उसकी पहचान की गई और साथ ही दो सह-आरोपियों को चेक के माध्यम से धन निकालते हुए पाया गया. यह भी पढ़ें : 11th Admission in US: क्या भारत में 10वीं के बाद अमेरिका में मिल सकता है 11वीं कक्षा में एडमिशन? जानिए सच्चाई और विकल्प
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ने कहा, ‘‘तकनीकी विश्लेषण से बाद में पता चला कि धोखाधड़ी करने वाला यह गिरोह उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आगरा तथा मध्य प्रदेश के भोपाल और शिवपुरी सहित कई शहरों में सक्रिय था. इन जगहों पर छापेमारी के बाद चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.’’ अधिकारी ने बताया कि गिरोह ने धन शोधन के लिए बहुत सारी प्रणालियों का इस्तेमाल किया. उन्होंने बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए कई बैंक खातों के माध्यम से धनराशि स्थानांतरित की और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी - विशेष रूप से यूएसडीटी (टीथर) में परिवर्तित कर दिया. गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और लूटे गए धन का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है.













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